एलोपैथी के खिलाफ बयान को लेकर दर्ज हुई एफआईआर पर रामदेव ने ली सुप्रीम कोर्ट की शरण

योग गुरु रामदेव ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर को’विड-19 के उपचार में एलोपैथी के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की।

रामदेव ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) पटना और रायपुर यूनिट द्वारा दर्ज कराई गई एफ़आईआर को लेकर दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने एफ़आईआर को एक साथ करने और कार्यवाही पर रोक लगाने की भी मांग की है।

रामदेव के खिलाफ भारतीय दंड की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश की अवज्ञा), 269 (जीवन के लिए खत’रनाक बीमारी के संक्रमण को फैलाने की लापरवाही से काम करने की संभावना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अन्य प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया गया।

एक वीडियो में, रामदेव को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया था, “एलोपैथी एक बेवकूफ विज्ञान है और दवाएं जैसे रेमेडिसविर, फैबीफ्लू, और भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल द्वारा अनुमोदित अन्य दवाएं CO’VID-19 रोगियों के इलाज में विफल रही हैं।”

16 जून को, छत्तीसगढ़ के रायपुर में पुलिस ने रायपुर की IMA यूनिट द्वारा रामदेव के खिलाफ CO’VID-19 के इलाज के लिए चिकित्सा बिरादरी द्वारा उपयोग की जा रही दवाओं के बारे में “झूठी” जानकारी फैलाने के लिए दायर एक शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की।