प्रशांत भूषण का तंज़ – सुप्रीम कोर्ट को प्रवासी मजदूरों से जरूरी लगी अर्णब की याचिका

महाराष्ट्र (Maharashtra) के पालघर में हुई दो साधुओं की लिंचिंग (Lynching) के मामले में टीवी में डीबेट के दौरान कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) के खिलाफ देश भर में एफ़आईआर दर्ज की गई थी।

इस मामले में अगले दिन ही सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने अर्णब की याचिका पर सुनवाई की और अर्णब गोस्वामी को फौरी राहत दी और गिरफ्तारी पर तीन सप्ताह तक रोक लगा दी। इस मामले में अब वकील प्रशांत भूषण ने तंज कसा है। भूषण का कहना है कि कोरोना के कहर के मारे मजदूरों को लेकर दायर की गई याचिका से ज्यादा जरूरी कोर्ट को अर्णब की याचिका लगी।

उन्होने ट्वीट कर कहा, लॉकडाउन की वजह से राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर जगदीप एस छोकर ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी इसे कोर्ट ने जरूरी नहीं समझा। एक हफ्ते तक इसे सुनवाई के लिए शामिल नहीं किया गया। लेकिन एफआईआर निरस्त करने के लिए अर्णब गोस्वामी द्वारा दायर की गई याचिका पर कोर्ट ने अगले दिन ही सुनवाई के लिए शामिल कर लिया।

बता दें कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के पूर्व प्रोफेसर और संस्थापक ट्रस्टी जगदीप एस छोकर और अधिवक्ता गौरव जैन की ओर से वकील प्रशांत भूषण द्वारा कोरोना नेगेटिव मजदूरों को उनको अपने घरों की तरफ जाने की इजाजत मांगी गई थी।

याचिका में कहा गया था कि उन प्रवासी मजदूरों को घर जाने की इजाजत दी जाए, जिनका कोरोना टेस्ट निगेटिव आया है। साथ ही यह मांग भी की गई थी कि राज्य सरकारों को इन लोगों को घर, गांव तक जाने की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए।


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