PM मोदी ने ट्वीट कर कहा – कोरोना जाति और धर्म नहीं देखता, एकता और भाईचारे पर दिया ज़ोर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि कोविड19 महामारी नस्ल, धर्म, रंग, जाति, पंथ, भाषा या सीमाओं को नहीं देखती है। इसलिए हमारी कोशिश और प्रतिक्रिया एकता और भाईचारे की प्रधानता वाली होनी चाहिए। हम सब इससे एक साथ जूझ रहे हैं।

उन्होने आगे कहा कि यह ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार करने का वक्त है, जिसमें धरती के गरीबों व वंचित लोगों की देखभाल को प्रधानता दी जानी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि हर संकट एक अवसर लाता है और कोरोना वायरस के साथ भी ऐसा ही है। यह इस बात का मूल्यांकन करने का वक्त है कि अब सामने आने वाले नए अवसर क्या हो सकते हैं।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत कोरोनावायरस महामारी के खत्म होने के बाद फिजिकल व वर्चुअल का एक सही मिश्रण बनकर जटिल मॉडर्न मल्टीनेशनल सप्लाई चेन में ग्लोबल नर्व सेंटर के तौर पर उभर सकता है। इसलिए आइए उस वक्त के लिए आगे बढ़ें और इस मौके का फायदा उठाएं।

उन्होंने कहा कि अभी चीन ने खुद को सप्लाई चेक के केन्द्र के तौर पर स्थापित कर रखा है। चीन जरूरी इक्विपमेंट्स की सप्लाई सभी लगभग सभी बड़े देशों को करता है, जिनमें अमेरिका और भारत भी शामिल हैं। हालांकि कोविड19 ने पूरी सप्लाई चेन को बिगाड़ दिया है, बीजिंग से इंपोर्ट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में यह बहस शुरू हो गई है कि क्या एक ही देश पर किसी चीज के लिए इतना निर्भर रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अंग्रेजी वर्णमाला के पांच स्वर अक्षरों ए, ई, आई, ओ और यू से बने पांच शब्दों एडेप्टेबिलिटी यानी अनुकूलता, एफिशिएंसी यानी दक्षता, इन्क्लूजिविटी यानी समावेशिता, अपॉर्च्युनिटी यानी मौका और यूनिवर्सलिजम यानी सार्वभौमिकता के जरिए नई कार्य संस्कृति और बिजनेस माडल को अपनाने की बात कही है।