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NCERT का सुझाव – अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में उर्दू माध्यम के स्कूल खोले जाएं

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अल्पसंख्यक (मुस्लिम) समुदाय वाले इलाकों में उर्दू माध्यम के स्कूल खोले जाने का सुझाव दिया है।

एनसीईआरटी के शिक्षा के समावेशन विषय पर ‘विद्यालय प्रबंधन समिति के लिये संदर्शिका’ में कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों को कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। सामान्यत: उन्हें ऐसे विद्यालयों में पढ़ना पड़ता है जहां विद्यालय और कक्षा की परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं होती हैं और बहुसंख्यक समाज की संस्कृति और धार्मिक भावनाएं प्रभावी होती हैं।

इसमें कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को विशेष खानपान, पहनावे और रहन-सहन के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे मे मुस्लिम अल्पसंख्यकों की अच्छी खासी आबादी वाले क्षेत्रों में उर्दू माध्यम के विद्यालय खोले जाएं। ऐसे विद्यालयों में उर्दू को द्वितीय भाषा के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए और उर्दू सिखाने वाले शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता आदि के बारे में शिक्षकों को संवेदनशील बनाया जाना चाहिए। पाठ्यचर्या और शैक्षिक प्रक्रियाओं में अल्पसंख्यक समुदायों की संस्कृति का समावेश सुनिश्चित करना चाहिए।  एनसीईआरटी ने कहा कि विद्यालयों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के त्योहार मनाये जाने चाहिए। धार्मिक त्योहारों के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के साथ संवेदनशील तरीके से व्यवहार करना चाहिए। विद्यालय प्रबंधन समिति में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

इसमें कहा गया है कि अवश्यक्ता के अनुसार अनुसूचित जाति की बहुलता वाले इलाकों में विद्यालय खोले जाएं। इसमें कहा गया है कि भेदभावपूर्ण तरीकों की पहचान करना हालांकि असान काम नहीं है क्योंकि बहुत सारे व्यवहार सामाजिक प्रथाओं, परंपराओं का रूप ले चुके हैं एवं प्रचलन में हैं। इन्हें सामान्यत: नजरंदाज कर दिया जाता है।

विद्यालय में कक्षावार परिचर्चा की नियमावली या दिशा निर्देश तैयार किया जाए जहां बैठने की व्यवस्था इस तरह से सुनिश्चित की जाए जिससे कि जाति, लिंग, समुदाय आदि के आधार पर भेदभाव न हो।

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