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Tuesday, October 19, 2021

झारखंड विधान सभा में नमाज के कमरे को लेकर मचा बवाल, अध्यक्ष ने भी बड़ा बयान

झारखंड विधानसभा में नमाज अदा करने के लिए एक कमरा आवंटित करने की अधिसूचना पर विपक्षी भाजपा द्वारा सदन की कार्यवाही को बाधित करने के बाद अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने मंगलवार को कहा कि पुराने विधानसभा भवन में इस उद्देश्य के लिए एक कमरा आवंटित किया गया था।

स्पीकर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “पुराने विधानसभा भवन में भी एक कमरा हुआ करता था, जिसे नमाज अदा करने के लिए आवंटित किया गया था।” यह पूछे जाने पर कि क्या इसी तरह की अधिसूचना पहले जारी की गई थी, महतो ने कहा: “अधिसूचना तक क्यों जाएं, आपको पुराने विधानसभा भवन के चित्रों की जांच करनी चाहिए।” हालांकि, अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि पुरानी इमारत की योजना को साझा किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने कहा, “मुझे [विधानसभा सचिवालय के] अधिकारियों से जांच करनी है कि क्या सार्वजनिक किया जा सकता है।” अध्यक्ष सितंबर 2019 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए विधानसभा भवन का उद्घाटन करने से पहले इस्तेमाल किए गए परिसर का जिक्र कर रहे थे।

हालांकि महतो ने यह टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि किसके आदेश पर नवीनतम अधिसूचना जारी की गई थी, झारखंड विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी 2 सितंबर के आदेश पर अवर सचिव नवीन कुमार द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। जिसमे लिखा,“नई विधानसभा भवन में, कमरा नंबर TW-348 नमाज के लिए आवंटित किया गया है। यह विधानसभा अध्यक्ष के आदेश से है।”

वर्तमान में, विधानसभा में कुल 81 विधायकों में से चार मुस्लिम हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाफिजुल हसन ने कहा कि हालांकि उनके या किसी अन्य मुस्लिम विधायक द्वारा नमाज के लिए कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया गया था, लेकिन जब भी सत्र होता है तो लगभग 50 मुस्लिम होते हैं जो विधानसभा में विभिन्न पदों पर रहते हैं। उन्होने कहा, “मुझे नहीं लगता कि कमरों के आवंटन में कोई समस्या है। पहले भी हमने नमाज अदा की थी, लेकिन कमरे औपचारिक रूप से आवंटित नहीं किए गए थे।”

हसन ने कहा, “पहले, मेरे पिता [मंत्री हाजी हुसैन अंसारी जिनका पिछले साल नि’धन हो गया] कहा करते थे कि उन्होंने भी पुराने विधानसभा भवन में नमाज अदा की।” द इंडियन एक्सप्रेस से बात करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि अतीत में ऐसा कोई कमरा आवंटित किया गया था या नहीं।

हालांकि कांग्रेस के पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने कहा कि 2000 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने नमाज के लिए एक कमरा आवंटित किया था, लेकिन बाद में उन्होंने इससे इनकार कर दिया। सिंह ने कहा कि 1980 के दशक की बिहार विधानसभा में मुस्लिम विधायकों को नमाज अदा करने के लिए एक कमरा दिया गया था। उन्होने कहा, “कुछ मुस्लिम विधायकों ने कार्यवाही से कुछ समय की मांग की थी क्योंकि उन्हें नमाज़ अदा करने के लिए मस्जिद जाना था। उन्हें अनुमति दी गई, और बाद में उन्हें नमाज अदा करने के लिए एक कमरा भी दिया गया।”

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