सऊदी-रूस में छिड़ा प्राइस वॉ’र, जल्द मिलेगा भारत में 50 रुपये लीटर पेट्रोल

सऊदी अरब (Saudi Arabia) और रूस के बीच कीमतों को लेकर जारी विवाद की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 30 फीसदी तक गिर गई हैं। सऊदी अरब की ओर से प्राइस में कटौती के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 1991 के बाद इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 14.25 डॉलर या 31.5 फीसदी गिरकर 31.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। 17 जून 1991 को पहला खाड़ी यु’द्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। इसके अलावा कोरोनो वायरस के प्रकोप की वजह से मांग में कमी को भी कीमतों में गिरावट की एक वजह बताया जा रहा है।

इसका सीधा फाइदा अब भारत को होगा। अगर 30 पर्सेंट तक की गिरावट के लिहाज से देखें और मान लें इंपोर्ट बिल घटने से होने वाली पूरी बचत ग्राहकों तक पहुंच जाती है तो घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम 50 रुपये के करीब पहुंच सकते हैं। आज देशभर में पेट्रोल के दाम 70 रुपये के आसपास हैं।

बता दें कि कोरोनावायरस के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हो रही लगातार गिरावट को थामने के लिए ओपेक और सहयोगी देश तेल उत्पादन में रोजाना 1.5 मिलियन बैरल कटौती की योजना बना रहे थे, लेकिन रूस ने इस पर अपनी सहमति नहीं दी। इसके बाद विश्व के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब ने रविवार को कच्चे तेल की कीमतों में कटौती की घोषणा कर दी।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों में 20 साल की सबसे बड़ी कटौती की है। सऊदी ने अप्रैल डिलीवरी में सभी देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको यूरोपीय देश के लिए अरबियन लाइट क्रूड की बिक्री ब्रेंट के मुकाबले 10.25 डॉलर प्रति बैरल सस्ती दर पर बेच रही है।


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