मुस्लिम युवक ने जगन्नाथ रथ यात्रा पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका

भुवनेश्वर. ओडिशा के नयागढ़ जिले के 19 वर्षीय मुस्लिम छात्र आफताब हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर भगवान जगन्नाथ यात्रा पर रोक लगाने के फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है। याचिका पर आज सुनवाई हो सकती है।

बीए इकोनॉमिक्स के अंतिम वर्ष के छात्र आफताब हुसैन ने अपनी याचिका में कहा है कि पुरी शहर को पूरी तरह से बंद कर मंदिर के पुजारी और सेवकों की तरफ से ही रथयात्रा निकाली जा सकती है और इस तरह रथ यात्रा की परंपरा टूटने से बचाई जा सकती है।

उन्होंने कहा है कि मंदिर में 1172 सेवक हैं। इन सभी का कोविड-19 टेस्ट किया जा चुका है जो निगेटिव आया है। तीनों रथ खींचने के लिए 750 लोगों की आवश्यकता होती है। मंदिर के पास 1172 सेवक हैं। ये लोग ही रथों को खींचकर गुंडिचा मंदिर तक ले जा सकते हैं। इस तरह रथयात्रा बिना बाहरी लोगों के शामिल हुए भी निकाली जा सकती है। पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है।

आफताब हुसैन को सोशल मीडिया पर राज्य का दूसरा सलाबेग कहा जा रहा है। सलाबेग मुस्लिम व्यक्ति और भगवान जगन्नाथ के बड़े भक्त थे। मुख्य तीर्थ से गुंडिचा मंदिर तक की तीन किलोमीटर की यात्रा के दौरान सम्मान के रूप में ग्रैंड रोड पर स्थित सलाबेग की कब्र के पास स्वामी का रथ कुछ देर के लिए रुकता है।

मुगल सूबेदार के पुत्र सलाबेग ओडिशा के भक्ति कवियों के बीच विशेष स्थान रखते हैं क्योंकि उन्होंने अपना जीवन भगवान जगन्नाथ को समर्पित कर दिया था। वह 17वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुए थे। हुसैन ने कहा कि वह बचपन से ही भगवान जगन्नाथ से प्रभावित रहे हैं और उनके दिवंगत दादा मुलताब खान भी उनके भक्त थे।

बता दे कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रथयात्रा पर रोक के अपने फैसले में कहा था कि कोरोना महामारी के इस काल में रथयात्रा की अनुमति दी तो भगवान जगन्नाथ हमें कभी माफ नहीं करेंगे।


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