राष्ट्रगान के लिए खड़े नहीं होना कोई जुर्म नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय ने अपने एक निर्णय में स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रगान के लिए खड़े नहीं होना संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों का पालन करने में अनादर और विफलता के समान हो सकता है। लेकिन राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत अप’राध नहीं।

न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एकल पीठ ने भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जि’कल स्ट्राइक का जश्न मनाने के लिए 29 सितंबर 2018 को आयोजित समारोह में राष्ट्रगान का कथित रूप से अनादर करने के लिए एक कॉलेज व्याख्याता के खिलाफ प्राथमिकी रद्द कर दी।

कोर्ट ने अवलोकन किया – “अधिनियम की धारा 3 के तहत … हालांकि राष्ट्रगान बजते समय खड़े न होना या राष्ट्रगान के गायन में चुप खड़े रहना जैसे व्यक्तियों का कुछ आचरण राष्ट्रगान के प्रति अनादर दिखाने के बराबर हो सकता है, लेकिन यह अप’राध नहीं होगा।।”

आगे कहा गया, “दिलचस्प और निर्विवाद रूप से, केवल भारतीय राष्ट्रगान का अनादर करना अपराध नहीं है। यह केवल तभी है जब किसी व्यक्ति का आचरण भारतीय राष्ट्रगान के गायन को रोकने या इस तरह के गायन में लगे किसी भी सभा में बाधा उत्पन्न करने के बराबर हो, यह अधिनियम की धारा 3 के संदर्भ में दं’डात्मक परिणाम देता है।

बता दें कि व्याख्याता के खिलाफ धारा 3 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। छात्रों के एक समूह ने उनके खिलाफ यह कहते हुए प्रदर्शन किया कि उन्होंने उक्त समारोह में राष्ट्रगान का अनादर किया है। छात्रों ने एसडीएम के पास लिखित आवेदन दिया। इसके बाद एसडीएम के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज की गई।