करोड़ो के मामले में हैदराबाद के निजाम के वंशज फिर पहुंचे ब्रिटिश अदालत

लंदन: हैदराबाद के निज़ाम के वंशज ने बुधवार को लंदन के उच्च न्यायालय में ब्रिटेन के बैंक खाते में पड़े 35 मिलियन पाउंड (लगभग 325 करोड़ रुपए) से अधिक के अदालती आदेश को फिर से चुनौती दी है।

पिछले साल लंदन में रॉयल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में दिए गए एक फैसले में, जस्टिस मार्कस स्मिथ ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाया था। बता दें कि लंदन के एक बैंक में करीब 7 दशक से कई 100 करोड़ रुपए फंसे हुए थे। जिस पर पाकिस्तान ने भी अपना दावा जताया था। इस मुकदमे में पाकिस्तान हार गया।

हालांकि, अब निजाम के अन्य वंशज नजफ अली खान ने सातवें निजाम के 116 उत्तराधिकारियों की तरफ से इस सप्ताह इस निर्णय को चुनौती देने की बात कही और सातवें निजाम के प्रशासक पर ‘‘विश्वासघात’’ का आरोप लगाया। खान ने अदालत से कहा कि भारत और दो शहजादों-मुकर्रम जाह तथा उनके छोटे भाई मुफ्फकम जाह को अनुचित रूप से धन जारी किया गया। उन्होंने खुद के वित्तीय संकट में होने का भी दावा किया।

न्यायाधीश स्मिथ ने मामले को फिर से खोलने के नजफ अली खान के प्रयास को खारिज करते हुए कहा, ‘‘मैंने 2019 में अपने निर्णय में उस धन का लाभ स्वामित्व तय किया था…यह स्वीकार करना असंभव है कि उन्हें मामले को फिर से खोलने का अधिकार दिया जा सकता है।’’

न्यायाधीश सातवें निज़ाम की संपत्ति के प्रशासक द्वारा अभद्रता के आरोपों पर बुधवार और गुरुवार को सुनवाई करेंगे। प्रशासक स्पष्ट रूप से भारत सरकार को किए गए भुगतान और कुल धन पर उनके गोपनीय समझौते के आधार पर दोनों राजकुमारों के पास बचे धन से लगभग 400,000 पाउंड रखता है।


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