असम में गैस के कुएं में लगी भीषण आग, काबू पाने में लग सकता है एक महीना

असम के तिनसुकिया जिले में स्थित बागजान तेल कुआं में मंगलवार को भीषण आग लग गई। कुएं से पिछले 14 दिन से अनियंत्रित तरीके से गैस का रिसाव हो रहा था। घटनास्थल पर नेशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) की टीम पहुंच गई। आग बुझाने का काम जारी है।

आग की इस घटना में ऑयल फील्ड के आसपास के कम से कम 30 मकान जल गए हैं। आग की लपटें काफी दूर से देखी जा रही हैं। एहतियात के तौर पर घटनास्थल के आसपास से 1610 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर हटा दिया गया है। आग बुझाने में जुटे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) का एक दमकलकर्मी बुरी तरह घायल हो गया है। ऑयल इंडिया का कहना है कि इस आग पर काबू पाने में चार सप्ताह तक का वक्त लग सकता है।

27 मई को हुए भीषण विस्फोट के बाद आज की घटना से आसपास की जैव विविधता को अच्छा-खासा नुकसान हुआ है।  मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने घटना के संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से फोन पर बात कर आग को बुझाने में तत्काल मदद मांगी है। कुएं में आग उस वक्त लगी जब वहां सफाई अभियान चल रहा था।

घटना के बारे में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार ने लोगों की सुरक्षा में पहले से ही कई कदम उठाए हैं। लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख सचिव और डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं। एनडीआरएफ, अर्धसैनिक बल और जिला प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं। इस बारे में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से भी बात हुई है और उन्हे घटना की जानकारी दी गई है।

ऑयल इंडिया ने एक बयान में कहा कि कुएं के आसपास हो रहे प्रदर्शनों के मद्देनजर मुख्य सचिव और तिनसुकिया जिला प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने का अनुरोध किया गया है, ताकि विशेषज्ञ वहां तक पहुंच सकें और कुएं को नियंत्रित करने का अभियान शुरू कर सकें।

बयान में कहा गया है कि ऑयल इंडिया और ओएनजीसी के कर्मचारियों को वहां से हटाया जा रहा है और हालात सामान्य होने के बाद सिंगापुर की फर्म ‘‘अलर्ट डिजास्टर कंट्रोल’’ के विशेषज्ञ और सरकारी कंपनी के विशेषज्ञ मौके पर पहुंचेंगे। बयान में कहा गया है कि कुएं से हो रहे गैस के रिसाव को रोकने में सोमवार से ही जुटे सिंगापुर के तीन विशेषज्ञों को विश्वास है कि हालात पर काबू पाया जा सकता है और कुएं को सुरक्षित बचाया जा सकता है।

बयान के अनुसार, इस पूरे अभियान में चार सप्ताह का समय लगने की संभावना है लेकिन विशेषज्ञों की टीम इसे कम करने में जुटी है।


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