नेपाल ने बिहार में निर्माण कार्य रोका, पहले भी कर चुका है गो’लीबारी

भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद (Bharat Nepal Seema Vivad) हल होने के बजाय गहराता जा रहा है। नेपाल ने अब बिहार के उत्तरी चंपारण जिले के ढाका ब्लॉक में स्थित लालबकेया नदी पर तटबंधी कार्य को रोक दिया है।नेपाल ने पिलर नंबर 346 और 347 के बीच चल रहे मरम्मत और कटावरोधी कार्यों पर रोक लगा दी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के रौतहट जिले के मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) बासुदेव घिमिरे कुछ और नेपाली अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के साथ 15 जून को नेपाल की सीमा से सटे पूर्वी चंपारण जिले में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बिहार के जल संसाधन विभाग में जल निकासी विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रणबीर प्रसाद से मरम्मत का काम रोकने के लिए कहा।

मोतिहारी के बाढ़ नियंत्रण विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर उमा नाथ राम ने एक अखबार को बताया कि लालबकेया नदी हर साल मानसून सीजन में बाढ़ का कारण बनती है। इसलिए यहां हर साल तटबंधी का कार्य किया जाता है। हमें इस बार 4.1 किलोमीटर की दूरी तक इस तटबंधी को ऊंचा करना था। हमने 3.6 किलोमीटर तक काम पूरा कर भी लिया, लेकिन नेपाल बॉर्डर पुलिस ने इस काम को रुकवा दिया। राम के मुताबिक, नेपाल की तरफ से तो 3.1 किमी का काम पूरा होने के बाद ही आपत्ति आना शुरू हो गई थीं, लेकिन फिर भी हमने 500 मीटर काम किया। इसके बाद नेपाली अफसरों ने खुद आकर काम बंद करा दिया।

सुपरिटेंडेंट इंजीनियर राम के मुताबिक, लालबकेया के पास मजबूत तटबंधी काफी जरूरी है। हम इसे 12 फीट ऊपर तक उठा रहे थे, ताकि बाढ़ को रोका जा सके। इसके लिए रेत की बोरियों का इस्तेमाल किया जा रहा था जो किसी भी तरह के कटाव को रोक लेती हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि नेपाल की तरफ से पहली बार लालबकेया नदी के पास तटबंधी के काम में रोड़ा पिछले साल अटकाया गया था, तब नेपाल की तरफ रौथट जिला प्रशासन ने कहा था कि जिस जगह निर्माण कार्य हो रहा है, वह दोनों देशों के बीच विवादित स्थल है और वहां निर्माण कार्य रोकना होगा।

गौरतलब है कि नेपाल बॉर्डर पुलिस ने कुछ दिन पहले ही सीतामढ़ी से सटी सीमा पर फाय’रिंग कर दी थी। इसमें 1 भारतीय की मौ’त हुई थी, जबकि दो अन्य लोग ज’ख्मी हुए थे। इस घटना के बाद नेपाल ने कहा था कि कुछ भारतीय सीमा पार करने के दौरान जवानों से भिड़ गए थे, जिसके बाद बॉर्डर पुलिस को एहतियातन उन्हें रोकने के लिए यह कदम उठाना पड़ा।


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