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Saturday, October 23, 2021

सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्‍ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर लगाई रोक

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के हो रहे दुरूपयोग के चलते सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. साथ ही कोर्ट ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने दिशा/निर्देशों में कहा कि ऐसे मामले में अब पब्लिक सर्वेंट की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी. गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच होगी. साथ ही गिरफ्तारी से पहले जमानत दी जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग को स्वीकारते हुए कहा कि यदि कोई आरोपी व्यक्ति पब्लिक सर्वेंट है, तो नियुक्ति प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना, यदि व्यक्ति एक सार्वजनिक कर्मचारी नहीं है तो जिला के वरिष्ठ अधीक्षक की लिखित अनुमति के बिना गिरफ्तारी नहीं होगी.

कोर्ट ने ये भी कहा कि ऐसी अनुमतियों के लिए कारण दर्ज किए जाएंगे और गिरफ्तार व्यक्ति व संबंधित अदालत में पेश किया जाना चाहिए. मजिस्ट्रेट को दर्ज कारणों पर अपना दिमाग लगाना चाहिए और आगे आरोपी को तभी हिरासत में रखा जाना चाहिए जब गिरफ्तारी के कारण वाजिब हो. यदि इन निर्देशों का उल्लंघन किया गया तो ये अनुशासानात्मक कार्रवाई के साथ साथ अवमानना कार्रवाई के तहत होगी.

महाराष्ट्र की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ये अहम फैसला सुनाया है. गौरतलब है कि एससी/एसटी एक्ट के तहत कई मामले फर्जी भी सामने आ चुके हैं.

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