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Saturday, October 23, 2021

जामिया मिलिया इस्लामिया का अल्पसंख्यक दर्जा गलत: मोदी सरकार

केन्द्र की मोदी सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे का विरोध किया है.

5 मार्च को सरकार की और से दाखिल इस हलफनामे में नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशनस (एनसीएमईआई) के उस फैसले  का विरोध किया गया. जिसमे एनसीएमईआई ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी को धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा प्रदान किया है.

मोदी सरकार ने अपने विरोध के पक्ष में में कोर्ट में दाखिल किए अपने हलफनामे में अजीज बाशा बनाम भारत गणराज्य केस (साल 1968) का हवाला भी दिया.

इस केस का हवाला देते हुए हलफनामे में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो यूनिवर्सिटी संसद एक्ट के तहत शामिल है, उसे अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं माना जा सकता.

बता दें कि UPA सरकार में साल 2011 में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने एनसीएमईआई के फैसले का समर्थन करते हुए कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जामिया के अल्पसंख्यक संस्थान होने की बात स्वीकारी थी.

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