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Thursday, October 21, 2021

अल्पसंख्यक स्कूलों में मुसलमानों की हिस्सेदारी सिर्फ 22.75 फीसदी: एनसीपीसीआर रिपोर्ट

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा जारी एक रिपोर्ट से पता चला है कि अल्पसंख्यक स्कूलों में मुसलमानों की हिस्सेदारी सिर्फ 22.75 फीसदी है। बावजूद मुस्लिम समुदाय धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी में 69.18% की हिस्सेदारी रखता है।

ईसाई समुदाय, जो कुल अल्पसंख्यक आबादी का 11.54% है, भारत के कुल धार्मिक अल्पसंख्यक स्कूलों में 71.96% की हिस्सेदारी है। सिख समुदाय कुल धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी में 9.78% की हिस्सेदारी का योगदान देता है और धार्मिक अल्पसंख्यक स्कूलों में उसकी 1.54% की हिस्सेदारी है।

इसी तरह जैन समुदाय धार्मिक अल्पसंख्यक आबादी में 1.90% की हिस्सेदारी है और धार्मिक अल्पसंख्यक स्कूलों में 1.56% की हिस्सेदारी का योगदान देता है। पारसी समुदाय, जो कुल धार्मिक आबादी का 0.03% है, भारत में कुल धार्मिक अल्पसंख्यक स्कूलों का 0.38% हिस्सा है।

रिपोर्ट के अनुसार, 4085 अल्पसंख्यक स्कूल मुसलमानों द्वारा चलाए जाते हैं जबकि 12920 अल्पसंख्यक स्कूल हैं, जो ईसाइयों द्वारा संचालित हैं। अन्य अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों की तुलना में मुस्लिम समुदाय द्वारा संचालित स्कूलों में मुस्लिम समुदाय से नामांकन की उच्च दर है। ईसाई स्कूलों में गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों की संख्या सबसे अधिक है।

मुस्लिम समुदाय द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में 75% से अधिक छात्र मुस्लिम समुदाय से संबंधित हैं। दूसरी ओर, जैन समुदाय द्वारा स्थापित स्कूलों में जैन छात्र आबादी का 20% से कम है, जबकि सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों के स्कूलों में संबंधित अल्पसंख्यक समुदायों के 30% से कम छात्र हैं। कुल मिलाकर, अल्पसंख्यक स्कूल अल्पसंख्यक बच्चों की आबादी का केवल 7.95% हिस्सा ही पूरा कर रहे हैं।

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