तबलीगी जमात पर फेक खबर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची जमीयत उलेमा

निज़ामुद्दीन मरकज मामले के सामने आने के बाद तब्लीगी जमात के खिलाफ मीडिया बड़े पैमाने पर सामने आ रही फेक खबरों के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जमीयत ने मीडिया के एक वर्ग पर जमात के कार्यक्रम को लेकर सांप्रदायिक नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

अपनी याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कोर्ट से केंद्र सरकार को दुष्प्रचार रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने की अपील की है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद और उसके कानूनी प्रकोष्ठ के सचिव की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि तबलीगी जमात की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का इस्तेमाल पूरे मुस्लिम समुदाय को दोष देने में किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया है कि निजामुद्दीन मर्कज़ में हुए तब्लीगी जमात के कार्यक्रम को लेकर मीडिया ने एकतरफा मुहिम चलाई। मीडिया ने पूरी जानकारी न दिखाते हुए सिर्फ कुछ ही तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश किया। मीडिया ने मुसलमानो की नकारात्मक छवि बनाने की कोशिशों के तहत कुछ इस तरह खबरें दिखाईं, जिससे लगे कि इस देश में कोरोना संक्रमण मुसलमानो द्वारा जानबूझ कर फैलाया गया है।

इतना ही नहीं याचिका में कहा गया है कि मीडिया ने तब्लीगी जमात और मुसलमानो के लिए जानबूझकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया और मुसलमानो को कोरोना संक्रमण के लिए उत्तरदायी ठहराने की कोशिश की।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम समाज के लोगों को गलत तरीके से पेश करने की वजह से मुसलमानों की जिंदगी और उनकी आजादी को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस वजह से संविधान की धारा-21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

बता दें कि निजामुद्दीन मरकज में पिछले महीने हुए धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से कम से कम 9,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस वक्त देश में 1000 से ज्यादा तबलीगी जमात के लोग कोरोना पॉजिटिव हैं।वहीं उनके संपर्क में आए 25,500 से ज्यादा लोगों को देश के विभिन्न हिस्सों में पृथक वास में रखा गया है।


    देश के अच्छे तथा सभ्य परिवारों में रिश्ता देखें - Register FREE