MSO ने लिया संकल्प – ईद पर नहीं करेंगे ख़रीदारी, घरों पर की ठहरने की अपील

नई दिल्ली। इस साल कोरोना महामारी के मद्देनज़र सभी को ईद पर भीड़भाड़ से बचना चाहिए। इसके लिए मुसलमान समुदाय को ख़रीदारी के मोह से बचकर ईद को सादगी से मनाना चाहिए। यह बात भारत में मुस्लिम छात्रों के सबसे बड़े संगठन एमएसओ ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही।

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुजात अली क़ादरी ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहाकि कोरोना कोई साधारण बीमारी नहीं है। यह छूत से फैलने वाली ख़तरनाक महामारी है। इसलिए इस बार ईद पर मुसलमानों को ख़रीदारी के लिए बिल्कुल बाज़ार जाने से बचना चाहिए। इससे उनको तीन फायदे होंगे। वह कोरोना महामारी के संक्रमण से अपना और परिवार का बचाव कर पाने में सक्षम होंगे। इसके साथ साथ आर्थिक संकट की इस घड़ी में अपने परिवार के लिए आवश्यक बचत को फिज़ूल में ख़र्च करने से बचेंगे। यह देश के लिए एक योगदान भी होगा। क़ादरी ने कहाकि इस्लाम में ईद पर नए कपड़ों की बजाय साफ़ कपड़े पहनने पर विशेष ज़ोर दिया गया है। यदि सादगी से ईद मनाई जाए तो यह इस्लामी परम्परा के अनुरूप ही होगा।

क़ादरी ने याद दिलाया कि देश पर जब भी संकट आया है, मुसलमानों ने व्यय को बचाकर देश की प्रगति में सहयोग दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि चीन के साथ युद्ध के दौरान 1962 में और पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान सन् 1965, 1971 और 1975 के दौरान मुसलमानों ने ईद पर ग़ज़ब के धैर्य का परिचय देते हुए अनावश्यक ख़र्च से बचकर देश पर कोई आर्थिक बोझ नहीं डाला। यही नहीं जब तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्रीजी ने एक समय भोजन कर खाद्यान्न बचाने का आह्वान किया था, तब भी भारत के मुसलमानों ने ईद पर अनावश्यक ख़रीदारी नहीं की। यह उनके राष्ट्रीय कर्तव्यनिष्ठा और देश प्रेम का अपूर्व परिचय था।

शुजात क़ादरी ने कहाकि इस परम्परा को आगे बढ़ाते हुए जबकि देश में कोरोना महामारी का इतना भंयकर प्रकोप हैं, इस समय बड़ा सहयोग यह है कि हम एक दूसरे से भौतिक दूरी का पालन करें। इस स्थिति में बाज़ार में ख़रीदारी के नाम पर अनावश्यक भीड़ से यह दूरी कम होगी और वायरस फैलेगा। यह देश को संकट में डालने वाली स्थिति होगी। इसलिए जिस तरह भारत के मुसलमानों ने देश को 1962, 1965, 1971 और 1975 में ईद सादगी से मनाकर देश का साथ निभाने का परिचय दिया था, यह स्थिति वर्ष 2020 में भी दोहराई जानी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जब रमज़ान में मस्जिदों में तरावीह और जुमे की नमाज़ ही नहीं पढ़ी जा रही, ऐसे में बाज़ार में अनावश्यक भीड़ से कोरोना को हराने की प्रतिबद्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए हमें ख़रीदारी से बचते हुए, देश को कोरोना वायरस से लड़ते हुए घरों पर सुरक्षित ठहरकर सहयोग देना चाहिए।

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडिया ने अपनी सभी राज्य ईकाइयों को निर्देश दिया है कि वह स्थानीय स्तर पर मुसलमानों ख़ासकर युवाओं को समझाएं कि ईद सादगी से मनाकर वह कोरोना संकट से निपटने में प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और सरकार को सहयोग करें। इस बार किसी भी प्रकार की ईद ख़रीदारी से बचें।


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