भुखमरी से लड़ने में नाकाम रही मोदी सरकार ने ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: वैश्विक भुखमरी सूचकांक यानी ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) में दुनिया के 117 देशों में भारत 102वें स्थान पर है। भारत दुनिया के उन 45 देशों में शामिल है जहां ‘भुखमरी काफी गंभीर स्तर पर है।’ भारत का स्थान अपने कई पड़ोसी देशों से भी नीचे है। ऐसे में मोदी सरकार ने भुखमरी से निपटने के बजाय ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ पर ही सवाल उठा दिए।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा और राव इंदरजीत सिंह ने राज्यसभा में बताया कि यह सूचकांक आम जनसंख्या की खाने त पहुंच और भूख के स्तर का सही मापदंड पेश नहीं करता। केंद्रीय मंत्रियों ने संसद में कहा, “ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019 के मुताबिक, भारत में 6 महीने से लेकर 23 महीने तक के सिर्फ 9.6% बच्चों को ही न्यूनतम स्वीकार्य आहार मिलता है।”

सूचकांक के मुताबिक, न्यूनतम स्वीकार्य आहार का मतलब है कि बच्चों को अलग-अलग पोषक तत्व और खाने की प्रायिकता इतनी रही हो कि उनका शारीरिक और मानसिक विकास न रुके। मंत्री ने कहा कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स चार पैमानों पर देशों को परखता है। ये चार पैमाने- कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, चाइल्ड वेस्टिंग और बच्चों की वृद्धि में रोक हैं।

हमारे अनुमान के मुताबिक, जिस तरह सूचकांक बनाया जाता है, उसमें 70% वेटेज बच्चों के अल्पपोषण को दिया जाता है। जो अपने आप में कई सामाजिक निर्धारकों और वंचितों पर इसके प्रभाव के कारण पैदा होता है। इसलिए यह सूचकांक भूख और पूरी जनसंख्या मे खाने की कमी को ठीक से नहीं दर्शाता। राव इंदरजीत ने आगे कहा, “सरकार लगातार भूख और कुपोषण के मुद्दे को प्राथमिकता के साथ अलग-अलग कार्यक्रम चलाकर सुधारने की कोशिश में जुटी है। देश में खाद्य सुरक्षा की बेहतरी के लिए स्कीम्स चलाई जा रही हैं।”

बता दें किजीएचआई को भूख के खिलाफ संघर्ष की जागरूकता और समझ को बढ़ाने, देशों के बीच भूख के स्तर की तुलना करने के लिए एक तरीका प्रदान करने और उस जगह पर लोगों का ध्यान खींचना जहां पर भारी भुखमरी है, के लिए डिजाइन किया गया है। इंडेक्स में यह भी देखा जाता है कि देश की कितनी जनसंख्या को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल रहा है. यानी देश के कितने लोग कुपोषण के शिकार हैं।


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