घुसपैठियों को निकालने वाली मोदी सरकार ने 14,864 बांग्लादेशियों को नागरिकता दी

बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से निकालने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार ने पिछले 5 सालों में करीब 15 हजार लोगो को नागरिकता दी है।

राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के जवाब में नित्यानंद राय ने बताया है कि बीते पांच साल में भारत सरकार ने 14864 बांग्लादेशी लोगों को नागरिकता दी है। उन्होंने बताया है कि 2015 में भारत-बांग्लादेश के बीच हुए सीमा समझौते के बाद 14864 बांग्लादेशी लोगों को नागरिकता दी गई।

गृह राज्य मंत्री की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 18,999 लोगों को भारतीय नागरिकता दी गई है। इसमें से 15,036 लोग बांग्लादेश से हैं। चूंकि, 14,864 लोग पहले से ही भारतीय क्षेत्र में रह रहे थे, इसलिए इन्हें एलबीए पर हस्ताक्षर करने के बाद नागरिकता दे दी गई। यानी 2105 से 2020 के बीच केवल 172 बांग्लादेशियों को व्यक्तिगत आधार पर नागरिकता दी गई।

अगर एलबीए के आंकड़ों को निकाल दें तो गृह मंत्राल के मुताबिक, मोदी सरकार के कार्यकाल में 2,935 पाकिस्तानी, 914 अफगान, 113 श्रीलंकाई और एक म्यांमार राष्ट्रीय को भारतीय नागरिकता दी गई।

बता दें कि असम में एनआरसी के तहत बाहर हुए लोग और डिटेंशन सेंटर का मसला काफी समय से देश में चर्चा में है। असम में 2019 में एनआरसी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। जिसमें 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया था। एनआरसी के दौरान 3,30,27,661 लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था, जिसमें से 3,11,21,004 लोगों के नाम उस लिस्ट में शामिल किए गए थे।


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