असम के तिनसुकिया गरीबी के चलते युवक ने बेची अपनी किडनी

असम के तिनसुकिया जिले के एक शख्स ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के भरण-पोषण के लिए कोलकाता में अपनी कि’डनी 4 लाख रुपये में बेच दी। अब तिनसुकिया पुलि’स ने उसे पूछताछ के लिए हिरा’सत में लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

दरअसल, पुलि’स क्षेत्र में मानव अं’ग तस्क’री रैकेट के कथित अस्तित्व की जांच कर रही है। पिछले सोमवार को ही पु’लिस ने असम के मोरीगांव जिले में मानव अं’गों के अवैध व्यापार में शामिल एक अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया था।

तिनसुकिया के श्रीपुरिया के अरूप कुमार सिन्हा 2020 में लॉकडाउन लागू होने के बाद से बेरोजगार हो गए थे। लोन के पैसों को चुकाने के लिए उन्होंने जल्दी पैसे के लिए अपनी किड’नी बेच दी। सिन्हा को 5 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें केवल 2.5 लाख रुपये ही मिले हैं।

मीडिया से बात करते हुए, सिन्हा की पत्नी शीना ने कहा, “मेरे पति ने अपनी किड’नी बेच दी क्योंकि हम कर्ज में डूबे हुए थे। वह कि’डनी ट्रांसप्लांट के लिए कोलकाता गए थे। ऑपरेशन 2020 में दिसंबर के महीने में किया गया था। वह इस साल जून में वापस असम आया था। हमें माइक्रो-फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों ने धम’की दी थी और इसलिए ड’र के मारे यह कदम उठाया।

शीना ने यह भी कहा कि पोम्पी भाईदो नाम की एक महिला ने परिवार की ओर से कई मानव अंग तस्क’री गिरोहों से संपर्क किया था। तीन साल पहले भाईदो ने खुद अपनी कि’डनी अपने रिश्तेदार को डोनेट की थी। उसने दावा किया कि उसने सिन्हा के परिवार के साथ गैर सरकारी संगठनों के संपर्क साझा किए थे।

इस बीच, तिनसुकिया के पुलिस निरीक्षक आर सैकिया ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि गरीब लोगों को अपने परिवारों को भोजन और आश्रय प्रदान करने के लिए इस तरह के साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। व्यावसायिक उपयोग के लिए किड’नी बेचना एक दंड’नीय अपरा’ध है और इसलिए, सिन्हा को आगे की जांच के लिए हिरासत में लिया गया है।सिन्हा मूल रूप से मणिपुर के रहने वाले हैं। हालांकि वह पिछले सात साल से तिनसुकिया में श्रीपुरिया में किराएदार के तौर पर रह रहा है।