कोरोना से मुस्लिमों की ज्यादा मौ’त, अब महाराष्ट्र सरकार उर्दू में देगी जानकारी

महाराष्ट्र में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। राज्य में कोरोना से मरने वालों में मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में अब महाराष्ट्र सरकार कोविड-19 के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए उर्दू का सहारा लेगी। इतना ही नहीं इस मुहिम में शामिल करने के लिए स्थानीय स्तर पर मस्जिद और मौलानाओं को भी जोड़ा जाएगा।

आंकड़ों के मुताबिक कोरोना के सबसे ज्यादा शिकार मुस्लिम समुदाय के लोग हो रहे हैं। 3 मई तक राज्य में 548 लोगों की मौत हुई थी जिसमें से 44 फीसदी मुसलमान थे। जबकि महाराष्ट्र की कुल जनसंख्या में मुसलमानों की हिस्सेदारी सिर्फ 12 फीसदी है।

राज्य के महामारी विशेषज्ञ प्रदीप आवटे कहते हैं, “खाड़ी मुल्कों से लौटनेवाले लोगों की एयरोपोर्ट पर स्क्रीनिंग नहीं हुई. यही सबसे बड़ा कारण संक्रमण फैलने का बना. हमने पाया कि कई लोगों में कोरोना लक्षण नहीं होने के बावजूद संक्रमण फैला। इसलिए हमारा प्रयास है कि स्थानीय स्तर पर उन हस्तियों को तलाशा जाए जो बीमारी के बारे में स्थानीय लोगों को बता सकें। हम जल्द ही उर्दू के जरिए जागरुकता संदेश फैलाएंगे जिससे स्पॉट बने इलाके मालेगांव और मुंबई के अल्पसंख्यक इलाकों में पहुंचा जा सके।”

सराकारी अधिकारियों और एक्सपर्ट का कहना है कि महाराष्ट्र में कोरोना से मुसलमानों की इसलिए ज्यादा मौतें हो रही हैं क्योंकि यहां लोग लॉकडाउन का ठीक तरीके से पालन नहीं करते हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों से लौटने वाले लोगों पर देर से पाबंदियां लगाई गईं। साथ ही 20 मार्च तक यहां के कई लोग मस्जिदों में जुमे की नमाज भी अदा करते रहे। काफी घनी आबादी के चलते भी कई इलाकों में सोशल डिसटेंसिंग का भी ठीक से पालन नहीं हो पाता है।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में तब्लीगी जमात से कोरोना वायरस के फैसले का मामला बहुत ही सीमित रहा है। सूबे में सिर्फ 69 केस जमात से जुड़े थे और जिसमें एक की मौत हुई।


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