मद्रास हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद पर लगाया 10 लाख का जुर्माना, कहा – कोरोना के डर का फायदा उठा रही

मद्रास हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने कोरोनिल शब्द का इस्तेमाल बंद करने का आदेश भी दिया है।

जस्टिस सीवी कार्तिकेयन ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए कंपनी के ‘कोरोनिल’ ट्रेडमार्क इस्तेमाल करने पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी। इसके साथ ही कहा कि वे महामारी से डरे हुए लोगों का फायदा उठाते हुए कोरोना के इलाज के नाम पर सर्दी, खांसी और बुखार के लिए इम्यूनिटी बूस्टर बेच कर पैसा कमाने की फिराक में लगे हुए थे।

जस्टिस सीवी कार्तिकेयन ने कहा, ‘बचाव पक्ष (पतंजलि) ने खुद इस कानूनी प्रक्रिया को मोल लेने का काम किया है। वह आसानी से चेक कर सकती थी कि कोरोनिल एक रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है।’ जस्टिस कार्तिकेयन ने कहा कि पतंजलि को यह समझना चाहिए कि व्यापार में कोई समानता जैसी चीज नहीं होती। यदि उन्होंने यह चेक नहीं किया कि इस नाम से पहले ही कोई ट्रेडमार्क है तो यह उनकी गलती है। पतंजलि की ओर से कोर्ट में जानकारी न होने का तर्क नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि इस आपदा की घड़ी में कई ऐसी संस्था हैं जो लोगों की नि:स्वार्थ भाव से मदद कर रही हैं। ऐसे में प्रतिवादी उन संस्थाओं को यह जुर्माने की राशि दें। आद्यार कैंसर इंस्टीट्यूट और गवर्नमेंट योग एंड नेचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज ऐसी ही दो संस्था हैं जो लोगों का फ्री में इलाज कर रही हैं। इसलिए इन दोनों संस्थानों को पांच-पांच लाख रुपये दिए जाए।

बता दें कि चेन्नई की कंपनी अरुद्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड ने दावा किया था कि सन 1993 से उसके पास ‘कोरोनिल’ ट्रेडमार्क है। पीटीआई के मुताबिक, साल 1993 में ‘कोरोनिल-213 एसपीएल’ और ‘कोरोनिल-92 बी’ का रजिस्ट्रेशन कराया गया था। वह तब से उसका रिन्युअल करा रही है।


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