सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास करने वाला मध्यप्रदेश बना पांचवा राज्य

नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने के लिए मध्य प्रदेश कैबिनेट ने भी बुधवार को प्रस्ताव पास कर दिया। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में भी संशोधन की मांग की गई है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल और राजस्‍थान विधानसभा में सीएए विरोधी प्रस्‍ताव पास किया जा चुका है। इस कानून को संविधान की भावनाओं के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने का अनुरोध किया गया है।

सरकार ने संकल्प पत्र में कहा…

  • संकल्प पत्र में कहा- यह पहला अवसर है जब धर्म के आधार पर विभेद करने के प्रावधान संबंधी कोई कानून देश में लागू किया गया है। इससे देश का पंथनिरपेक्ष रूप और सहिष्णुता का ताना-बाना खतरे में पड़ जाएगा।
  • कानून में ऐसे प्रावधान किए गए जो लोगों की समझ से परे हैं और आशंका को भी जन्म देते हैं। इसके परिणाम स्वरूप ही देशभर में कानून का व्यापक विरोध हुआ है और हो रहा है।
  • मध्यप्रदेश में भी इस कानून के विरोध में लगातार प्रदर्शन देखे गए हैं जो कि शांतिपूर्ण रहे हैं। इनमें समाज के सभी वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। इन तत्वों के मद्देनजर मध्यप्रदेश शासन भारत सरकार से आग्रह करता है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को निरस्त किया जाए।
  • साथ ही ऐसी नई सूचनाएं, जिन्हें राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर 2020 में अद्यतन करने के लिए कहा है उन्हें भी वापस लिया जाए। उसके बाद ही जनगणना का काम हाथ में लिया जाए।

वहीं विपक्षी दल बीजेपी ने इस प्रस्ताव को लेकर सरकार पर हल्ला बोला। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सत्तारूढ़ कांग्रेस तथा मुख्यमंत्री कमलनाथ पर जमकर निशाना साधा। उन्होने कहा, सीएए तो लागू होकर रहेगा कमलनाथजी, दुनिया की कोई ताकत इसे नहीं रोक सकती।’


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