दिव्यांग बच्चे के वास्ते इकबाल को चोरी करनी पड़ी साइकिल, मालिक के लिए छोड़ा माफीनामा हुआ वायरल

कोरोना संकट के बीच प्रवासी मजदूर किस तरह भी अपने घरों को पहुंचाना चाहते है। लाखों की संख्या में लोग अपने घरों की और बिना साधन के ही निकल रहे है। इसी बीच राजस्थान में तो एक प्रवासी मजदूर तो किसी की साइकिल ही उठा ले गया। पता तब चला जब साइकिल मालिक को एक चिट्ठी मिली, जिसमें मजदूर ने मजबूरी में साइकिल चुरा ले जाने की जानकारी देते हुए चिट्ठी में कई मार्मिक बातें लिखी।

चिट्ठी में प्रवासी मजदूर ने लिखा है कि मैं आपका कसूरवार हूं। लेकिन, मजदूर हूं और मजबूर भी। मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना। मेरे पास कोई साधन नहीं है और विकलांग बच्चा है। मुझे बरेली तक जाना है। साइकिल के मालिक का भी बड़प्पन देखिए जब, बरामदे में झाड़ू लगाते वक्त मिली यह चिट्ठी पढ़ी तो उसकी आंखें भर आईं। उसने तत्काल ही साइकिल चोरी की पुलिस में रिपोर्ट लिखवाने का इरादा ही बदल दिया।

इकबाल की चिट्ठी पढ़ने के बाद साइकिल के मालिक साहब सिंह बताते हैं कि बरामदे में खड़ी साइकिल जब सुबह नहीं मिली तो चिंता हुई। काफी खोजबीन भी की। लेकिन, झाड़ू लगाते वक्त बरामदे में मिला कागज का टुकड़ा पढ़ने के बाद चोरी होने का जो आक्रोश और चिंता दिल में थी। वह अब संतोष में बदल गई है।

उन्होने कहा, मेरे मन में साइकिल ले जाने वाले मोहम्मद इकबाल के प्रति अब कोई द्वेष नहीं है। बल्कि तसल्ली इस बात की है कि मेरी साइकिल सही मायने में किसी को दर्द का दरिया पार करने में काम आ रही है। यही सोचकर ही मेरा सीना प्रफुल्लित है।

साहबसिंह कहते हैं कि मजबूर और लाचार मोहम्मद इकबाल ने बेबसी में यह दुस्साहस किया। अन्यथा बरामदे में और भी कई कीमती चीजें पड़ी थी, जिन्हें उसने हाथ भी नहीं लगाया। मोहम्मद इकबाल कहां से आया था। क्या करता था। कौन साथ में था। बरेली में कहां जाना था। इसका पता नहीं चल सका।


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