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4 सालों में मॉब लिंचिंग में गई 67 मुस्लिमों की जान, दलित भी हुए शिकार

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मोदी सरकार के आने के साथ महाराष्ट्र के पुणे से मोहसीन नामक शख्स की भीड़ के हाथों जान लेने का जो सिलसिला शुरू हुआ है। वह अब भी जारी है। अब तक 67 मुस्लिमों की जान चली गई है।

आकड़ों के मुताबिक पिछले 4 सालों में मॉब लिंचिंग के 134 मामले हो चुके हैं और एक वेबसाइट के मुताबिक इन मामलों में 2015 से अब तक 68 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इनमें दलितों के साथ हुए अत्याचार भी शामिल है। शिकार लोगों में 50% मुस्लिम है।

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ज़्यादातर मामले गोरक्षा के नाम पर हुई गुंडागर्दी से जुड़े है। 2014 में 3, 2015 में 12, 2016 में 24, 2017 में 37 और 2018 में  मामले सामने आ चुके है। ये सभी गोरक्षा से जुड़े है।

कुल मिलाकर गोरक्षा के नाम पर अब तक कुल 85 गुंडागर्दी के मामले सामने आ चुके हैं जिनमें 34 लोग मरे गए. और 289 लोगों को अधमरा कर दिया गया। बावजूद मोदी सरकार इन घटनाओं को रोकने में संजीदा नहीं दिख रही है।

देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह संसद में कहते हैं कि सबसे बड़ी लिंचिंग की घटना तो देश में 1984 में हुई थी। वहीं मोदी जी लोकतंत्र में मॉब लिंचिंग के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए कहकर अपना पल्ला झाड लेते है।

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