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Saturday, October 23, 2021

जाटों से टकराव के बाद एक असफल राजनेता ने बनायी करनी सेना, जानिए पूरा इतिहास..

जयपुर । पूरे देश में आजकल एक संगठन ‘करनी सेना’ सुर्ख़ियो में छाई हुई है। संजय लीला भंसाली की फ़िल्म ‘पद्मावत’ के विरोध में देश के कई राज्यों को हिंसा से झुलसा देने वाले इस संगठन का इतिहास भी बड़ा ही रोचक है। इस संगठन की अगुवाई लोकेंद्र सिंह कलवी कर रहे है जो ख़ुद को इस संगठन के सह संसाथपक भी बताते है। आजकल ‘पद्मावत’ के ख़िलाफ़ सबसे मुखर आवाज़ उन्ही की सुनवाई दे रही है।

हालाँकि इस बारे में भी विवाद है। अजीत सिंह ममडोली नामक शख़्स दावा करता है की उसने करनी सेना की स्थापना की थी। उसका यह भी दावा है की संगठन की स्थपाना के कुछ महीनो बाद उसने कलवी से जुड़ने का आग्रह किया था। इससे पहले आप किसी निष्कर्ष पर पहुँचे , हम आपको बता दे की कलवी एक असफल राजनेता थे जबकि ममडोली एक बिल्डर। कलवी, भाजपा और कांग्रेस दोनो दल के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है।

साल 2006 में श्री राजपूत करनी सेना की स्थापना की गयी। संगठन का नाम देवी करनी के नाम पर रखा गया जो पूरे राजस्थान में पूजी जाती है। इस संगठन की स्थापना जाटों के साथ हुए टकराव के बाद हुई। उस समय राजपूत समुदाय से ताल्लुक़ रखने वाले गैंगस्टर आनंदपल सिंह ने कथित तौर पर अवैध शराब के धंधे पर वर्चस्व की लड़ाई में जीवन राम गोदारा और हरफूल राम जाट की हत्या कर दी थी। इन हत्याओं के बाद जाटों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया।

इन प्रदर्शनो को राजनीतिक रूप से कई नेताओ ने भी समर्थन दिया। इसके बाद ही करनी सेना की स्थापना की गयी। हालाँकि 2008 में ममडोली ने कलवी से अलग होकर दूसरी करनी सेना बना ली। इसके बाद कलवी और ममडोली दोनो ही एक ही नाम के संगठन के दो धड़ों की अगुवाई करने लगे। फ़िलहाल कलवी का दावा है की उसके संगठन के साथ करीब आठ लोग जबकि ममडोली के साथ क़रीब तीन लाख लोग जुड़े हुए है। मालूम हो की कलवी के पिता चंद्र्शेखर सरकार में मंत्री भी रह चुके है।

कल्वी के पिता का नाम कल्याण सिंह कल्वी था। लोकेंद्र सिंह कल्वी 1993 के आम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे। बाद में 1998 में बीजेपी के टिकट पर भी चुनाव लड़ा था। दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1999 में कल्वी ने बीजेपी छोड़ दी। 2003 में उन्होंने राजनीतिक पार्टी के तौर पर राजस्थान सामाजिक न्याय मंच की स्थापना की और उस साल हुए विधानसभा चुनाव में 65 उम्मीदवार उतारे। बाद में वह फिर भाजपा में चले गए।

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