केरल HC ने लक्षद्वीप में तटीय बस्तियों के घरों को गिराने पर लगाई रोक

केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को लक्षद्वीप में समुद्र के पास स्थित 100 से अधिक घरों को गिराने पर रोक लगा दी, जिन्हें मालिकों को कथित तौर पर तटीय मानदंडों का उल्लंघन करने को लेकर द्वीप प्रशासन द्वारा नोटिस दिया गया था।

द्वीप के निवासियों ने इसे “अवैध” और “मनमाना” करार देते हुए आदेश के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी, यह तर्क देते हुए कि वे बरसों से समुद्र के करीब रह रहे हैं। नोटिस में कहा गया कि इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान का उल्लंघन कर घर बनाए गए है। वो हाई-टाइड लाइन के 20 मीटर की ही दूरी पर है। ये नो डेवलपमेंट जोन में आता है।

हालांकि कोर्ट ने प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी है। लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल को अदालत से दूसरा झटका लगा है। इससे पहले 23 जून को, केरल उच्च न्यायालय ने द्वीप के स्कूलों में डेयरी फार्मों को बंद करने और मध्याह्न भोजन से मांस उत्पादों को बाहर करने के आदेश पर रोक लगा दी थी।

द्वीपसमूह के निवासी लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन (2021) के मसौदे सहित इन नए नियमों का विरोध कर रहे हैं, जिसमें द्वीपों को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। हालांकि इसके लिए गुं’डा अधिनियम लागू  करने का प्रस्ताव और गोह’त्या पर प्रतिबंध लगाने की योजना है।

बता दें कि द्वीप की लगभग 90% आबादी मुस्लिम है और वे अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में द्वीप पर आरएसएस का एजेंडा लागू करने के आरोप लग रहे है।