कारगिल के लोगों की मांग – लद्दाख को बनाए अलग राज्य, धारा 370 फिर से हो लागू

लद्दाख के कारगिल जिले के राजनीतिक और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी से मुलाकात की और लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली पर चर्चा की।

कारगिल में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के गठबंधन कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के एक प्रतिनिधिमंडल ने नॉर्थ ब्लॉक में कनिष्ठ मंत्री के साथ दो घंटे से अधिक की बैठक की। बैठक के बाद गृह राज्य मंत्री ने कहा, मंत्रालय उनकी मांगों का अध्ययन करेगा और इसे शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को बताएगा। बता दें कि यह बैठक जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने और अनुच्छेद 370 की बहाली पर चर्चा के अलावा केंद्र शासित प्रदेश के लिए पूर्ण राज्य की मांग के कुछ दिनों बाद हुई है।

प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता सज्जाद हुसैन ने कहा ”हम लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा चाहते हैं। हम केंद्र शासित प्रदेश के विचार से खुश नहीं हैं। हमने माननीय मंत्री जी के साथ ढाई घंटे बिताए और अपनी मांग रखी है। हम अनुच्छेद 370 और 35 ए की बहाली भी चाहते हैं। हम सीमावर्ती इलाकों के निवासी हैं और हम राष्ट्र की ताकत बनना चाहते हैं। लेकिन 5 अगस्त के फैसलों ने भरोसे की कमी पैदा कर दी है। हमने अपनी संस्कृति, पहचान, भाषा, भूमि और नौकरियों के लिए सुरक्षा उपायों के बारे में भी बात की। कारगिल और स्कार्दू (गिलगित-बाल्टिस्तान में) मार्ग खोलने पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने हमें आश्वासन दिया कि हमारी मांगों पर गौर किया जाएगा”

राज्य के पूर्व मंत्री और केडीए के सह-अध्यक्ष कमर अली अखून ने कहा ने कहा, यह पहली मुलाकात थी। हम भविष्य में ऐसी और बैठकें चाहते हैं। हम गृह मंत्री अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी से भी मिलना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘पांच अगस्त के फैसले असंवैधानिक तरीके से लिए गए और अवैध रूप से राज्य का दर्जा छीन लिया गया… लोगों में इसको लेकर काफी नाराजगी है। हमने कभी भी केंद्र शासित प्रदेश होने की मांग नहीं की।”

उन्होने कहा, “लेह यूटी चाहता था … लेकिन वे अब कह रहे हैं कि यह बिना इंजन वाली कार है क्योंकि इसमें जमीन और नौकरियों की कोई सुरक्षा नहीं है। उन्होंने छठी अनुसूची की मांग की। हम छठी अनुसूची के पक्ष में नहीं हैं। इसलिए हम सभी इस बात पर सहमत हुए कि हमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना चाहिए और अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली की मांग करनी चाहिए। हमने इन मुद्दों को मंत्री के साथ उठाया था।”

अखून के अनुसार पूर्ण राज्य का दर्जा स्थानीय लोगों के हाथों में राजनीतिक और कार्यकारी शक्ति सुनिश्चित करेगा। “कोई सार्वजनिक प्रतिनिधित्व नहीं है। हमने उनसे यह भी कहा कि कोई विकास नहीं हो रहा है।