गोगई के राज्यसभा जाने पर बोले जस्टिस कुरियन – न्यायपालिका से आम लोगों का भरोसा हिल गया

नई दिल्ली. पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के राज्यसभा में नामांकन को लेकर पहले  ही गंभीर सवाल उठ रहे थे। इन सवालों को उठाने वालों में अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ भी शामिल हो गए। जोसेफ़ का मानना है कि पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने राज्यसभा के लिए नामांकन मंज़ूर करके ठीक नहीं किया और उनकी वजह से स्वतंत्र न्यायपालिका के प्रति आम लोगों का भरोसा ज़रूर डगमगाया है।

उन्होंने कहा कि वे हैरान हैं कि जिस सीजेआई ने कभी न्यायपालिका की निष्पक्षता और आजादी के लिए ऐसा साहस दिखाया था, उन्होंने ही आजादी के सिद्धांत से समझौता कर लिया। जस्टिस कुरियन ने कहा कि राज्यसभा नॉमिनेशन स्वीकार करके पूर्व सीजेआई ने न्यायपालिका की आजादी पर आम आदमी के यकीन को हिला दिया है और यह आजादी ही भारत के संविधान के मूल में हैं।

उन्होंने कहा कि इस घटना से लोगों के बीच ऐसी धारणा बन रही है कि न्यायपालिका में मौजूद न्यायाधीशों का एक धड़ा या तो निष्पक्ष नहीं रह गया है, या फिर भविष्य की योजनाओं पर काम कर रहा है। जिस मजबूत बुनियाद पर देश का ढांचा खड़ा किया गया है, वह हिल गया है।

जस्टिस कुरियन ने पूर्व सीजेआई गोगोई द्वारा 12 जनवरी 2018 को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी याद किया। उन्होंने कहा, ‘‘तब रंजन गोगोई ने न्यायपालिका की आजादी की बात करते हुए कहा था कि हम देश का कर्ज उतार रहे हैं। मैं हैरान हूं कि जिसने तब ऐसा साहस दिखाया था, उसी ने आज न्यायपालिका के मूल सिद्धांत से समझौता कर लिया।’’

जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा, ‘‘मैं आज लोगों के सामने आया हूं, क्योंकि देश की बुनियाद को खतरा है और यह बड़ा खतरा है। यही वजह है कि मैंने रिटायरमेंट के बाद कोई भी पद नहीं ग्रहण करने का फैसला किया था।’’ उन्होने कहा, मेरे अनुसार, भारत के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामांकन की स्वीकृति ने निश्चित रूप से न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आम आदमी के विश्वास को हिला दिया है, जो भारत के संविधान की बुनियादी संरचनाओं में से एक भी है।”

बता दें कि जनवरी 2018 में जस्टिस जोसेफ़, जस्टिस गोगोई, जस्टिस चेलमेश्वरम और जस्टिस मदन बी लोकुर ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उस समय सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।


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