काटजू की हाईकोर्ट से अपील – मेरे Email को PIL मान दे प्रवासी कश्मीरियों के हित में फैसला

देश भर में लॉक डाउन के चलते फंसे कश्मीरियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल से ईमेल भेजकर मदद की अपील की। काटजू ने कहा कि उनके ईमेल को PIL की तरह माना जाए और कश्मीरी छात्रों की मदद के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।

उन्होने ट्वीट किया,  ‘जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल को उन्होंने एक ईमेल भेजा है और उनसे अपील की है कि मेरे ईमेल को पीआईएल की तरह माना जाए और लॉकडाउन के चलते देशभर में फंसे कश्मीरी लोगों की मदद के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

काटजू ने ट्वीट में ये भी लिखा कि जस्टिस गीता मित्तल दिल्ली हाईकोर्ट में उनके मातहत काम कर चुकी है और वह उन्हें अच्छी तरह से जानते हैं।’ जस्टिस काटजू ने लिखा कि ‘लॉकडाउन में फंसे लोगों को उनके रिश्तेदारों से बात करने में मदद की जाए क्योंकि वहां पर 5 अगस्त से ही मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं।’

वहीं दूसरी और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है। लॉकडाउन में फंसे कश्मीरी छात्रों को रमजान में जम्मू-कश्मीर भेजने की व्यवस्था की जाए। लॉकडाउन की वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरी छात्र फंसे हुए हैं। सैकड़ों छात्र मध्यप्रदेश में भी फंसे हुए हैं।

अमित शाह को लिखी चिट्ठी में दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि प्रिय अमित शाह जी, भोपाल में फंसे जम्मू-कश्मीर के छात्र-छात्राओं को वापस उनके राज्य भिजवाने हेतु मेरे द्वारा आपको प्रेषित किया पत्र दिनांक 19.04. 2020 आपको मिल गया होगा। मैंने इस पत्र के साथ आपको 135 छात्रों की सूची प्रेषित की थी। इनके अलावा भी जम्मू-कश्मीर के भोपाल में 32, इंदौर में 54, ग्वालियर में 17 छात्रों के फंसे होने की सूचना प्राप्त हुई है। मध्यप्रदेश में करीब 400 कश्मीरी छात्र फंसे हुए हैं।

दिग्विजय ने लिखा कि चूंकि जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है और लॉकडाउन के कारण वहां के अन्य राज्यों में फंसे लोगों की परेशानियों को दूर करना और उन्हें विश्वास में लेना केंद्र सरकार का दायित्व है। इन छात्रों में अनेक छात्र मुस्लिम समाज के हैं और उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वे रमजान के पवित्र माह में अपने माता-पिता और परिवार के साथ रहना चाहते हैं।

मेरा आपसे अनुरोध है कि जिस प्रकार काशी से दक्षिण भारत के 1000 तीर्थयात्रियों को और राजस्थान के कोटा से उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के हजारों छात्रों को उनके राज्यों तक भेजने की अनुमति और प्रबंध किए गए हैं। उसी प्रकार मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में फंसे जम्मू-कश्मीर के छात्रा-छात्राओं को भी उनके राज्य में वापस भेजने की व्यवस्था करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।


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