नड्डा की बीजेपी नेताओं को नसीहत – कोरोना को न दे साम्प्रदायिक रंग, ट्विटर पर कराया था ट्रेंड “कोरोनाजिहाद”

भारत में कोरोना को मुसलमानों से जोड़ने और कोरोनाजिहाद शब्द का मुसलमानों के खिलाफ इस्तेमाल करने को लेकर अमेरिका ने हाल ही में भारत से स्पष्टीकरण मांगा था। इस पूरे मामले को लेकर अमेरिका ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

ऐसे में अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी नेताओं को नसीहत देते हुए कोरोना वायरस से उपजे हालात को साम्प्रदायिक रंग देने से बचने को कहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार की शाम राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ एक बैठक में नड्डा ने कहा कि पार्टी के किसी भी नेता को कोई भड़काऊ या विभाजनकारी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा कि मौजूदा हालात में प्रधान मंत्री के प्रयासों का समर्थन करना चाहिए, यह बिना सोचे और परवाह किए बिना कि किस राज्य में किस पार्टी की सरकार है?

उस बैठक में शामिल एक नेता ने बताया, “पहले से ही एक दिशा-निर्देश मिला हुआ था कि हमारे पास राष्ट्र का नेतृत्व करने की एक बड़ी जिम्मेदारी है। वायरस और बीमारी ने दुनिया भर में सभी को सभी धर्मों के प्रति संवेदनशील बना दिया है, किसी को भी ऐसा कोई बयान या टिप्पणी जारी नहीं करनी चाहिए जो उत्तेजक हो।”

उन्होंने कहा, “तब्लीगी मुद्दा सामने आने पर इसे फिर से दोहराया गया। वैसे पार्टी का एक निर्देश है कि किसी को भी इसे सांप्रदायिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। अल्पसंख्यक समुदाय के नेता ही उस पर टिप्पणी कर सकते हैं, यदि वे चाहें तो। लेकिन हमें वायरस के खिलाफ अपनी लड़ाई में एकजुट होना होगा।” बता दें कि पार्टी के कई समर्थकों ने, विशेष रूप से सोशल मीडिया पर, “कोरोनाजिहाद” और “मरकज साजिश” जैसे भड़काऊ पोस्ट किए हैं। बैठक में इस पर भी चर्चा की गई।

बता दें कि सोशल मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में बड़े पैमाने पर कोरोनाजिहाद शब्द का इस्तेमाल किया गया था। इतना ही नहीं बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने 1 अप्रैल को ट्वीट किया था, “दिल्ली का अंधेरा नाजुक मोड़ पर है! पिछले 3 महीनों में एक इस्लामिक विद्रोह देखने को मिला है, जिसमें सबसे पहले शाहीन बाग़ से लेकर जामिया, जाफ़राबाद से सीलमपुर तक का विरोध-सीएए का विरोध है। और अब मरकज़ में कट्टरपंथी तब्लीगी जमात का अवैध जमावड़ा। इसे ठीक करने की जरूरत है!


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