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Monday, September 27, 2021

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जारी किया अलगाववादी नेता गिलानी को दफ’नाने का वीडियो

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जम्मू और कश्मीर पुलिस ने कहा है कि उसके अधिकारियों को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के घर पर तीन घंटे तक इंतजार करने के लिए मजबूर किया गया था जब वे उन्हें दफ’नाने के लिए वहां गए थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यह भी कहा कि गिलानी के परिवार के सदस्यों ने “शायद पाकिस्तान के दबाव में” राष्ट्र वि’रोधी गतिविधियों का सहारा लिया।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिलानी के श’व को पाकिस्तानी झंडे (Pakistan Flag) में लपेटने और उनके घर पर देश विरोधी नारे लगाने को लेकर कड़े गैर कानू’नी गतिविधियां रोकथाम (UAPA) कानून के तहत मामला दर्ज किया है। जिसको लेकर राजनीति शुरू हो गई है।

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि गिलानी के शरीर के साथ किया गया व्यवहार अनावश्यक था। कोई जीवित व्यक्ति से लड़ सकता है, लेकिन मृ’त शरीर को उदासीन उपचार नहीं मिलना चाहिए। श्रीनगर में महबूबा ने कहा कि वीडियो और समाचार से पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के लोग काफी निराश हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को परिवार की इच्छा के मुताबिक गिलानी का अंतिम संस्कार करने की इजाजत देनी चाहिए थी।

महबूबा ने कहा कि उनका भी गिलानी से मतभेद था, लेकिन श’व के प्रति उदासीन व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए था। हमने जो देखा वह मानवता के खिलाफ था। सभी की अंतिम इच्छा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी बंदू’क के बल पर किसी भी नेता से प्यार या नफरत करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है।

वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि गिलानी के निध’न के बाद आईजी कश्मीर विजय कुमार, एसपी और एएसपी ने उनके दोनों बेटों से रात 11 बजे मुलाक़ात की। उन्होंने शोक संवेदना व्यक्त की और आम जनता के व्यापक हित को देखते हुए रात में उन्हें दफ’नाने की गुजारिश की। दोनों इस पर सहमत हो गए। लेकिन वहां गिलानी के पा’र्थिव शरीर को पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया और पाकिस्तान के पक्ष में नारेबाजी की गई।

ट्वीट में कहा गया, पड़ोसियों को बाहर आने के लिए उकसाया गया। काफी देर तक मनाने के बाद रिश्तेदार उनके श’व को कब्रि’स्तान लेकर आए, जहां उन्हें दफ’नाने की प्रक्रिया इंतजामिया कमेटी के सदस्यों और स्थानीय इमाम की मौजूदगी में पूरी की गई। उनके दोनों बेटों के कब्रिस्तान आने से इनकार, उनके पाकिस्तानी एजेंडे के प्रति वफादारी का संकेत देता है, बजाय कि वे अपने पिता को प्यार और सम्मान के साथ अंतिम विदाई देते।

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