जामिया छात्र आसिफ को मिली जमानत, हाई कोर्ट ने भी कहा- टार्गेटेड लग रही है जांच

दिल्ली की एक अदालत ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को गत वर्ष दिसम्बर में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान विश्वविद्यालय के पास हुई हिं’सा से जुड़े एक मामले में बृहस्पतिवार को जमानत दे दी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव राव ने तन्हा को यह राहत 25,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर दी। अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी का पिछला जीवन साफ सुथरा रहा है, समानता के आधार पर और सबसे महत्वपूर्ण कोविड-19 के चलते उत्पन्न वर्तमान स्थिति को देखते हुए आरोपी को जमानत प्रदान की जाती है।’’ अदालत ने साथ ही तन्हा को निर्देश दिया कि चाहे जो भी हो वह किसी हिंसा के कृत्य में लिप्त नहीं हों और एक अच्छे जिम्मेदार नागरिक की तरह बर्ताव करें और कानून का पालन करें।

वहीं एक दूसरे मामले में हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने  पुलिस (Delhi Police) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि केस डायरी देखने के बाद लगता है कि पुलिस की जांच एक तरफा है। कोर्ट ने मामले से संबंधित डीसीपी को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (Jamia University) के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा (asif-iqbal-tanha) के मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि अब तक दूसरे पक्ष की जांच क्यों नहीं की गई है।

मामले की सुनवाई के समय कोर्ट ने कहा कि केस डायरी से ये साफ तौर पर दिख रहा है कि पुलिस ने एक तरफा जांच की है। जब पुलिस से पूछा गया कि इस मामले में अब तक क्या जांच हुई तो वो कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। जिसके बाद डीसीपी को आदेश दिया गया कि वो मामले में अपनी नजर बनाए रखें, और इसकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें। पुलिस ने आसिफ पर यूएपीए अधिनियम लगाया है।

अदालत में अर्जी दायर कर दिल्ली पुलिस ने तन्हा की न्यायिक हिरासत 30 दिन बढ़ाने का अनुरोध किया था। पुलिस ने तन्हा पर अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) लगाया है। अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए तन्हा की न्यायिक हिरासत 30 दिनों के लिए बढ़ा दी।


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