एर्दोआन ने कश्मीर को बताया फिलिस्तीन, भारत ने दिया जवाब – आंतरिक मामले में ना दे दखल

कश्मीर पर तुर्की के बयान को भारत ने खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि तुर्की पहले जमीनी स्थिति की उचित समझ हासिल करे। उसे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने आनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘ यह बयान तथ्यात्मक रूप से गलत, पक्षपातपूर्ण और अवांछनीय है। हम तुर्की की सरकार से आग्रह करते हैं कि वह जमीनी स्थिति की उपयुक्त समझ प्राप्त करे और भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से बचे।’

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर में पिछले एक वर्ष में विकास को लेकर अनेक सकारात्मक बदलाव हुए हैं जो ‘पूर्ण रूप से सामान्य स्थिति’ बहाली को प्रदर्शित करते हैं। श्रीवास्तव ने कहा, ‘ इस विशेष मामले के संदर्भ में, पिछले एक वर्ष में जम्मू कश्मीर में जम्मू कश्मीर में अनेक सकारात्मक बदलाव आए हैं। चाहे सुशासन सुनिश्चित करना हो या सामाजिक, आर्थिक विकास या आबादी के वंचित वर्ग को न्याय देने का हो।’

उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2019 में ब्लाक विकास परिषदों का चुनाव हुआ, मार्च 2020 में पहला ‘खेलो इंडिया’शीतकालीन खेल आयोजित हुआ, स्कूल फिर से खुले, नयी शैक्षणिक सुविधाएं स्थापित हुई, स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हुई एवं नये स्वास्थ्य केंद्र खुल रहे हैं। उन्होंने पिछले एक वर्ष में जम्मू कश्मीर में सकारात्मक विकास की सूची गिनाते हुए कहा कि क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का विकास हो रहा है, लंबित परियोजनाएं पूरी हुई हैं।

बता दें कि तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से करते हुए वहां अत्याचार करने का आरोप लगाया था। कश्मीर से धारा 370 हटने के एक साल पूरा होने पर तुर्की ने कहा कि जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद (370) को समाप्त करने के बाद से क्षेत्र में स्थिति और जटिल हो गई है।370 के हटने से वहां पर शांति नहीं आई है।


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