पूर्व आईएएस गोपीनाथन ने ठुकराया सरकार का ऑफर, कश्मीर को लेकर दिया था इस्तीफा

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ पिछले साल अगस्त में अपने पद से इस्तीफा देने वाले आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने दोबारा पदभार संभालने के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि वह संकट के समय एक वॉलनटियर के रूप में सरकार की मदद करेंगे लेकिन आईएएस अधिकारी के रूप में नहीं।

गोपीनाथन ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा, ‘सरकार से एक पत्र मिला है, जिसमें मुझे फिर से ड्यूटी ज्वॉइन करने को कहा गया है। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में मैं तन, मन और धन से सरकार के साथ हूं। मैं ऐसा एक IAS अधिकारी नहीं बल्कि जिम्मेदार नागरिक के नाते करने के तैयार हूं।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘मेरा सरकार को जवाब है, मुझे इस्तीफा दिए हुए लगभग 8 महीने हो चुके हैं। सरकार केवल उत्पीड़न करना जानती है। लोगों का और अधिकारियों का। मैं जानता हूं कि वे मुझे आगे भी प्रताड़ित करना चाहते हैं लेकिन फिर भी मैं सरकार को इस कठिन समय में एक स्वयंसेवी के रूप में मदद दूंगा लेकिन आईएएस अधिकारी के रूप में दोबारा जॉइन नहीं करूंगा।’

हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए गोपीनाथन ने कहा, “मैं अब कई तरह के कामों में लगा है। मैं ये करता रहूंगा। अगर सरकार चाहती है तो मैं दादर और नगर हवेली या देश के किसी भी हिस्से में बतौर वॉलेंटियर जा सकता हूं। IAS से इस्तीफा देना एक सोचा-समझा फैसला था और मैं इस पर अडिग हूं।” उन्होंने कहा कि वो नहीं जानते सरकार ने उन्हें फिर से ड्यूटी पर क्यों बुलाया है।

बता दें कि अगस्‍त 2018 में जब केरल में भीषण बाढ़ आई थी तो कन्नन गोपीनाथ सुर्खियों में आए थे। वह अपने गृह राज्‍य पहुंच गए थे और गुमनाम तरीके से राहत तथा बचाव कार्य में हिस्‍सा लिया था। उनके इस भेद का खुलासा तब हुआ जब एर्नाकुलम के कलेक्‍टर के मोहम्‍मद वाई सफिरुल्‍ला ने एक कलेक्‍शन सेंटर में उन्‍हें पहचान लिया।


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