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Thursday, October 21, 2021

जेएनयू के लापता छात्र नजीब की मां बोली – ‘मुझे अब भी लगता है कि वह जिंदा है’

पिछले पाँच सालों से अपने बेटे का लौटने का इंतज़ार कर रही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र नजीब अहमद की मां का कहना है कि उन्हे अब भी अपने बेटे का इंतज़ार है। उन्हे यकीन है कि उनका बेटा जिंदा है।  नजीब अहमद 15 अक्टूबर, 2016 को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से लापता हो गया थे, लापता होने से पहले नजीब की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों के साथ कथित तौर पर हाथापा’ई हुई थी।

अहमद के मामले की जांच देश की शीर्ष जांच एजेंसियों ने की है, लेकिन उनके परिवार का मानना है कि छात्र के लापता होने के लिए जिम्मेदार लोगों के साथ अधिकारियों की मिलीभगत है।  जेएनयू में मास्टर्स कर रहे 31 वर्षीय बायोटेक्नोलॉजी के छात्र के लापता होने के बारे में कुछ भी पता नहीं है। एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाला वह तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा था।

लेकिन अहमद की मां फातिमा नफीस ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को फिर से देखने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। उन्होने कहा, “मुझे अब भी विश्वास है कि वह जीवित है और उसे किसी जेल में डाल दिया गया है। एक दिन वह निश्चित रूप से वापस आएगा।”

नफीस ने कहा कि वह सरकार से नाराज हैं क्योंकि करीब पांच साल बाद भी उनका बेटा नहीं मिला है। उनका कहना है कि “उनका गायब होना सरकार की साजिश का हिस्सा था, इसलिए उनसे ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती है। मेरे बच्चे को दूसरों द्वारा मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया है।” अहमद ने 1 अगस्त 2016 को जेएनयू में दाखिला लिया और उसी साल 15 अक्टूबर को गायब हो गया। नफीस ने कहा, “पहले कन्हैया कुमार और फिर नजीब का मामला। इन दो घटनाओं ने लोगों में ड’र पैदा कर दिया, जिसे सरकार अपना ध्यान भटकाने वाला मानती है।”

नफीस का कहना है कि पुलि’स और जांच एजेंसियों ने शुरू से ही मामले को कमजोर करने और संदिग्धों को बचाने की कोशिश की। “उन्होंने नजीब को ठीक करने के लिए तत्परता से काम नहीं किया। लेकिन मैं इन लोगों को उनके मंसूबों में कामयाब नहीं होने दूंगी।”

अहमद के छोटे भाई हसीब ने कहा कि परिवार एक नई कानूनी ल’ड़ाई के लिए तैयार है। नफीस के लिए, ल’ड़ाई तब तक जारी रहती है जब तक कि उसका बेटा वापस नहीं आ जाता और उसके साथ फिर से मिल नहीं जाता। उन्होने कहा, “मुझे यकीन है कि मुझे न्याय मिलेगा।”

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