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CAA पर केरल सरकार की याचिका, गवर्नर आरिफ मोहम्मद बोले – मैं कोई रबर स्टांप नहीं हूं

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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के केरल सरकार के फैसले पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार को पहले उन्हें सूचित करना चाहिए था। सरकार के पास कोर्ट जाने का अधिकार है लेकिन पहले उन्हें राज्यपाल को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।

राज्यपाल ने कहा कि केरल में एक संवैधानिक पद का मुखिया होने के बावजूद मुझे सरकारी फैसले की सूचना अखबार से मिल रही है। साफ तौर पर कहता हूं कि मैं सिर्फ रबर स्टाम्प नहीं हूं। मुझे सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन सबसे पहले राज्यपाल को सूचित करना चाहिए था। अब मैं पता लगाऊंगा कि क्या राज्य सरकार राज्यपाल की अनुमति के बिना सुप्रीम कोर्ट जा सकती है?

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गौरतलब है कि CAA के खिलाफ विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार पर निशाना साध रही हैं। इस क्रम में केरल की सरकार ने विधानसभा में CAA के विरोध में प्रस्ताव पास कर दिया और फिर इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 131 का उपयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है।

विजयन सरकार ने सीएए को संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन बताया था। सरकार का कहना था कि यह धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल सिद्धांत के खिलाफ है।राज्य सरकार ने 2015 में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से गैर-मुस्लिम प्रवासियों के प्रवास को नियमित करने वाले पासपोर्ट कानून और विदेशियों (संशोधन) आदेश में 2015 में किए गए परिवर्तनों की वैधता को भी चुनौती दी है, जो 2015 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं।

अनुच्छेद 131 क्या है?

संविधान का अनुच्छेद 131 सुप्रीम कोर्ट को ये अधिकार देता है कि वो राज्य बनाम राज्य या फिर राज्य बनाम केंद्र के मामलों की सुनवाई करे तथा उस पर फैसला दे। अनुच्छेद 131 के अंतर्गत राज्य और केंद्र में यदि किसी बात को लेकर विवाद हो तो उस स्थिति में राज्य सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है।

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