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Tuesday, October 26, 2021

मिलिए लॉकडाउन में एक करोड़. रुपये की स्कूल फीस माफ वाले हुसैन मुनीर शेख से

शाहताज खान/पुणे/मुंबई

पश्चिम मुंबई के मलाड में स्थित ‘होली स्टार इंग्लिश हाई स्कूल’ के एक राहत पैकेज के ऐलान ने लोगों को हैरान कर दिया है. स्कूल के प्रबंधक और प्रधानाचार्य हुसैन मुनीर शेख ने अपने स्कूल के सभी बच्चों की पिछले वर्ष और इस चालू वर्ष की लगभग एक करोड़ की फीस माफ कर दी है.

ख्वाब है या हकीकत

असंभव सी प्रतीत होने वाली यह खबर आज ही के दौर की है. आज जब शिक्षा केवल पैसा कमाने का जरिया बन गया है, तब एक व्यक्ति अपने जीवन भर की जमा पूंजी और यहां तक कि पत्नी के जेवर भी गिरवी रख कर, उन बच्चों का भविष्य संभालने की कोशिश कर रहा है, जो उसके स्कूल में पढ़ने आते हैं.

हुसैन मुनीर शेख बताते हैं कि 1000 बच्चों की पूरी फीस और अन्य बच्चों की जो भी शेष रकम बकाया थी, उसे पूरी तरह माफ कर दिया गया है. वो साथ ही कहते हैं, “350 से 400 रू फीस लेने वाले हमारे स्कूल की माली हालत इतनी मजबूत नहीं है, लेकिन मेरे लिए मेरे स्कूल का क्या महत्व है, मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता.”

उनका यह कदम जिसमें हुसैन मुनीर शेख ने 13 वर्ष से चल रहे स्कूल के स्टॉफऔर दूसरे सभी खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी तमाम जमा पूंजी 1535 बच्चों के लिए खर्च कर दी है, स्कूल से उनके लगाव को बयान कर रहा है.

भूखे भजन न होय गोपाला

होली स्टार इंग्लिश हाई स्कूल में स्लम एरिया से आने वाले बच्चों की संख्या अधिक है. मेहनत-मजदूरी कर के हर रोज भोजन का प्रबंध करने वाले यह लोग अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए पाई पाई जोड़ते हैं. लेकिन पिछले वर्ष अचानक लगने वाले लॉक डॉउन ने सब कुछ बदल कर रख दिया.

पहली कक्षा में पढ़ने वाली एक बच्ची की मां सुनीता मिश्रा कहती है कि मेरे पति की नोकरी चली गई. घर में खाने के लिए नहीं था, तो स्कूल की फीस कहां से भरते. तो अब्दुल जो चौथी कक्षा में पढ़ता है. उसने छोटे-मोटे काम करना शुरू कर दिए थे, क्योंकि उसके माता-पिता उसके स्कूल की फीस नहीं दे सकते थे. उसने मान लिया था कि अब वह कभी स्कूल नहीं जा सकता. परन्तु फीस माफ किए जाने के ऐलान ने अब्दुल के मुरझाए चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है. अब वह पढ़ेगा और कुछ बन कर दिखायेगा.

जब जैसी आवश्यकता

हुसैन मुनीर शेख अभी तक 25000 के करीब राशन किट भी अपने स्कूल के बच्चों के घरों तक पहुंचाते रहे हैं. इस काम में उनका सहयोग कई लोग कर रहे हैं. क्योंकि वह जानते थे कि बच्चों के लिए आन लाइन शिक्षा का प्रबंध करने से भी पहले उनके खाने का इंतजाम करना जरूरी है.

आस न टूटे

वह कहते हैं कि दस बाई दस की खोली में जहां पांच-छ लोग रहते हैं. वहां रह कर भी यह बच्चे पढ़ाई करते हैं. उनके माता-पिता अपने बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए हर कुरबानी देने को तैयार हैं लेकिन आज की परिस्थितियों ने उन्हें तोड़ कर रख दिया है. अभिभावकों को बातों, वादों की नहीं, बल्कि किसी ठोस सहायता की आवश्यकता थी जो उनकी आस ऋउम्मीद को न टूटने दे. हुसैन मुनीर शेख कहते हैं, हम ने वही छोटी सी कोशिश की है. बच्चों और उनके माता-पिता को मिलने वाली यह राहत जीवन दान से कम नहीं है.

बड़े-बड़े शिक्षण संस्थान फीस में मामूली कटौती करने के लिए तैयार नहीं हैं. माता-पिता फीस में कटौती की मांग को लेकर यहां वहां भटक रहे हैं. तब हुसैन मुनीर शेख का यह कदम सराहनीय है. उम्मीद कर सकते हैं कि ऐसी और भी खबरें सुनने और देखने को मिलेंगी.

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