नेपाल की सड़क आपत्ति पर बोले आर्मी चीफ – ‘किसी और के इशारे पर मामला उठाया’

नई दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे नेभारत द्वारा लिपुलेख-धारचुला मार्ग तैयार किए को लेकर नेपाल द्वारा आपत्ति किए जाने के सवाल पर परोक्ष रूप से चीनी भूमिका का संकेत देते हुए शुक्रवार को कहा कि नेपाल किसी और के कहने पर आपत्ति जता रहा है।

सेना प्रमुख ने कहा, ‘काली नदी के पूरब की तरफ का हिस्सा उनका है। हमने जो सड़क बनाई है वह नदी के पश्चिमी तरफ है। इसमें कोई विवाद नहीं था। मुझे नहीं पता कि वे किसी चीज के लिये विरोध कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘पूर्व में कभी कोई समस्या नहीं हुई है। यह मानने के कारण हैं कि उन्होंने किसी दूसरे के कहने पर यह मामला उठाया है और इसकी काफी संभावना है।’

बता दें कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए भारत की और से बनाई गई पिथौरागढ़ से लिपुलेख पास तक जाने वाली सड़क का रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में उद्घाटन किया था। इस सड़क के विरोध में काठमांडू में भारतीय राजदूत को तलब किया और कड़ी आपत्ति जताई है। इसके साथ ही नेपाल ने बुधवार को गर्बाधार-लिपुलेख सड़क को अतिक्रमण बता विवादित कालापानी क्षेत्र में सशस्त्र प्रहरी बल का बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) स्थापित कर दिया।

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने काठमांडू से इंडिया टुडे टीवी से विशेष बातचीत करते हुए कहा कि वे कभी भी इसके आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होने देंगे। नेपाल ने इसका विरोध करते हुए तीन दिन बाद काठमांडू में भारतीय राजदूत विनय मोहन को तलब कर डिप्लोमेटिक नोट सौंपा।

नेपाल द्विपक्षीय बातचीत चाहता है। भारत ने कहा है कि जमीन हमारी है।  इससे पहले अनुच्छेद 370 कि बाद जब भारत ने नक्शा पास किया था जिसमें लिपुलेख पास को भारत में दिखाया गया था तो भी नेपाल ने इसका विरोध किया था और आपत्ति जताई थी।


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