Home राष्ट्रिय बाबरी मस्जिद केस: हिन्दू तालिबान पर सुप्रीम कोर्ट में जमकर हंगामा

बाबरी मस्जिद केस: हिन्दू तालिबान पर सुप्रीम कोर्ट में जमकर हंगामा

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अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से सीनियर वकील राजीव धवन की और से इस्तेमाल किये गये हिन्दू तालिबान शब्द पर जमकर हंगामा हुआ।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि बाबरी मस्जिद अयोध्या में 1526 से थी और 6 दिसंबर 1992 तक रही, जब तक कि उसे ढहाया नहीं गया था। धवन ने कहा कि मस्जिद को ढहाने का काम किसी आतंकी हमले से कम नहीं था। 6 दिसंबर 1992 को हिंदुओं ने मस्जिद ढहाने के लिए हिंदू तालिबान की तरह काम किया।

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इस पर हिंदू पक्षकारों के कई वकीलों ने “हिंदू तालिबान’ शब्द पर आपत्ति जाहिर की। इस पर धवन ने कहा कि वह अपनी बात पर कायम हैं। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद हिंदू तालिबानियों ने ही ढहाई थी। तब चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने धवन की भाषा पर आपत्ति की और कहा कि आप गलत भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। वकीलों को कोर्ट की गरिमा और भाषा का ध्यान रखना चाहिए। इस पर धवन ने कहा कि वह चीफ जस्टिस की बात से सहमत नहीं हैं। उन्हें असहमत होने व अपनी बात रखने का अधिकार है और अपनी बात पर कायम हैं।

दूसरी और इस मामले में 1994 के इस्माइल फारूकी केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ भेजा जाए या नहीं? इस मुद्दे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में बहस पूरी हो गई। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। बेंच ने पक्षकारों से कहा कि वे 24 जुलाई तक अपनी दलीलें लिखित में पेश करें।

बता दें, पिछली सुनवाई में वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा था कि, ‘इस्लाम में मस्जिद की अहमियत है और यह सामूहिकता वाला मजहब है। इस्लाम में नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है। सामूहिक नमाज मस्जिद में होती है। मस्जिद कोई मजाक के लिए नहीं बनायी गयी थी, हजारों लोग यहां नमाज अदा करते हैं।’

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