डॉक्टर कफील की हिरासत का मामला – केंद्र और UP सरकार से हाईकोर्ट ने जवाब किया तलब

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को सीएए के विरोध के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में रासुका के तहत जेल में बंद डॉक्टर कफील खान की रिहाई से जुड़ी याचिका पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने डॉक्टर कफील खान की मां नुजहत परवीन द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 19 अगस्त तय की।  याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा, डॉक्टर कफील को एक सक्षम अदालत की तरफ से जमानत दे दी गई थी और उन्हें जमानत पर रिहा हो जाना चाहिए था। हालांकि, चार दिनों तक उन्हें रिहा नहीं किया गया और बाद में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगा दिया गया। इसलिए उनकी हिरासत अवैध है।

इस याचिका में डॉक्टर कफील पर रासुका लगाए जाने से पहले सभी मामलों में जमानत मिलने के बावजूद चार दिनों तक उन्हें हिरासत में रखे जाने को चुनौती दी गई। बता दें कि कफील खान नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान 10 दिसंबर, 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के बाद 29 जनवरी, 2020 से जेल में बंद हैं। त्तर प्रदेश सरकार ने इस भाषण को “भड़काऊ” मानते हुए उन पर रासुका लगा दिया।

उल्लेखनीय है कि डॉक्टर कफील खान की रिहाई की मांग को लेकर अब लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। इससे पहले प्रियंका ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी थी।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपनी चिट्ठी में कहा कि नागरिकता कानून का विरोध करने पर डॉ. कफील खान के उपर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया और उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। डॉ. कफील के साथ नाइंसाफी हो रही है। मैंने भी नागरिकता कानून का सड़क से लेकर संसद तक विरोध किया, लेकिन मेरे उपर राजद्रोह का केस नहीं दर्ज हुआ।


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