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Tuesday, October 19, 2021

ज्ञानवापी मस्जिद ने काशी मंदिर कॉरिडोर परियोजना के लिए अपने पास से दी जमीन

काशी विश्वनाथ धाम को भव्य बनाने में सहयोग देते हुए मुस्लिम समुदाय ने वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ी जमीन का एक टुकड़ा काशी मंदिर कॉरिडोर परियोजना के लिए दे दिया। मस्जिद से जुड़ी 17 सौ स्क्वायर फीट जमीन को धाम के निर्माण के लिए कानूनी कार्यवाही के बाद मंदिर के पक्ष को सौंप दिया गया है। वहीं मंदिर प्रशासन ने भी बदले में मुस्लिम समाज को एक हजार स्क्वायर फीट जमीन दी।

मस्जिद से जुड़े लोगों ने कहा कि मस्जिद द्वारा दी गई जमीन पहले प्रशासन को एक स्थायी पट्टे पर दी गई थी, ताकि बाबरी मस्जिद के विध्वं’स के मद्देनजर एक पुलिस नियंत्रण कक्ष बनाया जा सके। ट्रस्ट ने कई साल पहले वाराणसी में मंदिर गलियारा परियोजना के लिए इसकी मांग की थी।

अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद के संयुक्त सचिव और ज्ञानवापी मस्जिद के कार्यवाहक एस एम यासीन ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सौंपा गया प्लॉट मस्जिद से जुड़ा नहीं था और अलग है। “ज्ञानवापी मस्जिद समिति के तहत तीन भूखंड हैं।उनमें से एक में मस्जिद है, तो दूसरा भूखंड दो पूजा स्थलों के बीच एक सामान्य मार्ग है। बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के एक साल बाद दोनों जगहों की सुरक्षा के लिए नियंत्रण कक्ष बनाने के लिए तीसरा भूखंड जिला प्रशासन को सौंप दिया गया था।

यासीन ने कहा, मौके पर मौजूद पुलिस कंट्रोल रूम को अब प्रोजेक्ट के लिए ध्वस्त कर दिया गया है। यासीन ने कहा कि उत्तर प्रदेश सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के स्वामित्व वाली जमीन को असीमित अवधि के लिए और बिना किसी लेन-देन के पट्टे पर दिया गया था। “ट्रस्ट ने हमसे कुछ साल पहले यह जमीन देने का अनुरोध किया था, और इस तरह के हस्तांतरण के नियमों की जांच करने के बाद, हमने इसे 8 जुलाई को अंतिम रूप दिया।”

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने कहा कि ट्रस्ट को दी गई जमीन व्यावसायिक है और अधिक मूल्यवान है। फारूकी ने कहा, “अधिकारियों ने हमसे इसके लिए कहा क्योंकि काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर परियोजना के लिए इसकी आवश्यकता थी।”

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील वर्मा ने कहा कि ट्रस्ट और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बीच जमीन का ट्रांसफर किया गया है। उन्होने कहा, “जमीन का मस्जिद से कोई लेना-देना नहीं है। चूंकि यह जमीन नहीं खरीदी जा सकती थी क्योंकि यह वक्फ की संपत्ति है, हमने इसे बदल दिया, जो मूल्य के आधार पर किया गया था। मस्जिद को सौंपी गई भूमि अब तक श्री काशी विश्वनाथ विशेष क्षेत्र विकास बोर्ड के नियंत्रण में थी।”

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