लॉकडाउन में 15 लाख रुपए खर्च कर मुस्लिम परिवार बांट रहा निशुल्क भोजन

राजस्थान के कोटा जिले के सुकेत में गोल्डन स्टोन मालिक मरहूम हाजी अब्दुल रशीद भाई गोल्डन का परिवार लॉकडाउन में गरीबों की सेवा में जी-जान से जुटा हुआ है। रोजाना  सवा लाख रुपए खर्च कर गरीबों को निशुल्क भोजन उपलब्ध करा रहा है। ये सिलसिला लगातार 14 दिनों तक चलने वाला है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने जब सुना कि गोल्डन परिवार रोजाना 1 से सवा लाख रुपए खर्च कर रहा है तो उनको एक बार भरोसा नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने मौके पर पड़ताल की तो परिवार को सेल्यूट किया। वर्तमान में साढ़े 3 हजार से ज्यादा भोजन के पैकेट गोल्डन परिवार की ओर से वितरित हो रहे हैं। खास बात ये सामने आई कि ये परिवार जब तक लोगों को खाना नहीं खिला देते हैं, तब तक खुद भोजन ग्रहण नहीं करते हैं।

गोल्डन स्टोन की ओर से सवा लाख रुपए रोजाना खर्च करने की बात प्रशासन के कानों तक पहुंची तो वे यहां निरीक्षण करने पहुंचे। एसडीएम चिमनलाल मीणा, डिप्टी मनजीत सिंह, तहसीलदार राजेंद्र शर्मा, नगरपालिका ईओ पंकज मंगल, एसएचओ मोहन सिंह चारों भाइयों के सिस्टेमेटिक काम को देखकर दंग रह गए। सभी अधिकारियों ने परिवार के लोगों को सेल्यूट किया और शाबासी दी।

परिवार के सदस्य अकिल खान और मोहम्मद आलम शानू का कहना है कि हमारे पिताजी हमेशा कहा करते थे कि गरीबों की सेवा करना ही सच्चा धर्म है। पिताजी ने जो संस्कार सिखाए थे, उनको चारों भाई बदस्तूर निभा रहे हैं। पिता रशीद भाई ने गोल्डन स्टोन कंपनी की स्थापना की और क्षेत्र के गरीब मजदूरों को रोजगार दिया। जब भी गरीबों को मदद की जरूरत होती वे पिताजी के पास आते और मुस्कराते हुए लौटते थे। इसी क्रम को आजीवन रखने के लिए संकल्पित है। उनका मानना है कि हम सेवा करने के दाैरान इंसान देखते हैं, चाहे वह किसी मजहब का हो, उसकी मदद करते हैं।

वहीं अन्य सदस्य पप्पू भाई ने बताया कि शुरू में हमने सूखा राशन वितरित किया। इसमें 5 किलो आटा, 2 किलो दाल, 1 लीटर तेल, मसाले और राशन की सामग्री थी। शुरुआत में 2 हजार पैकेट रोजाना बांटे। इसी बीच जरूरतमंद लोगों को नकद राशि भी सौंपी गई। इसके बाद हमने खुद भोजन बनवाकर पुलिस के सहयोग से बंटवाना शुरू किया। वर्तमान में साढ़े 3 हजार भोजन के पैकेट बांटे जा रहे हैं। इस काम में रोजाना करीब 1 लाख 25 हजार रुपए खर्च हो रहा है। सुकेत के अलावा सातलखेड़ी में भी भोजन के पैकेट भेजे जा रहे हैं। इस परिवार के बेटे मोहम्मद तौसीफ, मोहम्मद सावेज और साहिल खान भी दादाजी के पदचिह्नों पर चलते हुए गरीबों की सेवा में जुटे हैं। इस कार्य में उनकी बुआजी पूर्व सरपंच खुसमदी आपा भी सहयोग करती हैं।

समाजसेवी रहे मरहूम हाजी अब्दुल रशीद भाई के पूरे परिवार की समाजसेवा सभी के लिए मिसाल है। संकट के समय में जो काम इस मुस्लिम परिवार ने किया है, वह काबिले तारीफ है। ऐसे समाजसेवी कम ही देखने को मिलते हैं। उपखंड क्षेत्र के दूसरे भामाशाहों को भी इससे प्रेरणा लेकर लोगों की मदद करनी चाहिए। – चिमनलाल मीणा, एसडीएम


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