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शरिया अदालत पर पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा – हर समुदाय को अपने पर्सनल लॉ मानने का अधिकार

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देश में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शरिया अदालतों को अपना समर्थन किया है। अंसारी ने कहा कि देश के सभी समुदायों को अपना पर्सनल लॉ मानने का हक है। उन्होने कहा, जो लोग सामाजिक प्रथाओं को विधि प्रणाली से जोड़ रहे हैं कि जो भ्रम फैलाने वाला है।

एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “हमारा कानून इस बात की इजाजत देता है कि हर समुदाय अपने नियम मान सकती है, भारत में पर्सनल लॉ-शादी, तलाक, गोद लेना, और उत्तराधिकार जैसे मुद्दे कवर करती है, हर समुदाय को अधिकार है कि वह अपने पर्सनल लॉ को माने।”

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बता दें कि ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश भर मे शरीयत अदालत खोलने की तैयारी कर रहा है। जिसके तहत हर लिए मे एक अदालत खोली जाएगी। इस प्रस्ताव को चर्चा के लिए 15 जुलाई को दिल्ली में होने वाली मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में पेश किया जाएगा।

बोर्ड की कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य, उत्तर प्रदेश के पूर्व अपर महाधिवक्ता जफरयाब जीलानी ने बताया, बोर्ड की अगली 15 जुलाई को लखनऊ में होने वाली बैठक अब उसी तारीख को दिल्ली में होगी। इस बैठक में अन्य मुद्दों के अलावा बोर्ड की तफ़हीम-ए-शरीयत कमेटी को और सक्रिय करने पर विचार-विमर्श होगा।

उन्होंने बताया कि बोर्ड की तफहीम-ए-शरीयत कमेटी का काम है कि वकीलों और जहां तक हो सके, न्यायाधीशों को भी शरिया कानूनों के फलसफे और तर्कों के बारे में बताये। यह समिति करीब 15 साल पुरानी है और देश के विभिन्न हिस्सों में सम्मेलन और कार्यशालाएं आयोजित करती है।

जिलानी ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 40 ऐसी अदालतें चल रही हैं। हम देश के सभी जिलों में कम से कम एक ऐसी अदालत खोलने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि दारुल-क़जा का उद्देश्य अन्य अदालतों के बजाय शरीयत कानूनों के हिसाब से मामलों को हल करना है।

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