सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस काटजू ने योग दिवस को बताया नौटंकी

आज पूरे देश और दुनिया में अंतराष्ट्रिय योग दिवस मनाया जा रहा है तो वहीं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कण्‍डेेय काटजू ने योग दिवस को नौटंकी करार दिया। उन्होने कहा कि जिनके पास रोटी नहीं है उनसे यह केक खाने को कहने जैसा है।

काटजू ने कहा, भारत में लोग योग नहीं बल्कि भोजन, नौकरी, आश्रय, उचित स्वास्थ्य देखभाल, अच्छी शिक्षा और अन्य आवश्यकताएं चाहते हैं। किसी भूखे या बेरोजगार पुरुष/महिला को योग करने के लिए कहना एक क्रूर चाल और भटकाव है। मैं इसे एक नौटंकी और नाटक मानता हूं। जब 50% भारतीय बच्चे कुपोषित हैं (ग्लोबल हंगर इंडेक्स देखें), हमारी 50% महिलाएं एनीमिक हैं और रिकॉर्ड बेरोजगारी है।

इस परिस्थिति में लोगों को योग करने के लिए कहना उतना ही बेतुका और बेहूदा है, जितना कि क्वीन मैरी एंटोनेट (Queen Marie Antoinette) का उन लोगों, जिनके पास रोटी नहीं थी, से कहना कि वह केक खाएं।

बहुत से लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, दिवाली, होली, फादर्स डे, मदर्स डे, बाल दिवस आदि के खिलाफ हूं? सिर्फ योग दिवस के खिलाफ ही क्यों? मैं योग या ऊपर वर्णित अन्य चीज़ों के खिलाफ नहीं हूं। मैं जिस चीज के खिलाफ हूं, वह राजनीतिक एजेंडे के लिए उनका अपहरण करना। रोमन सम्राट कहा करते थे, “अगर आप लोगों को रोटी नहीं दे सकते, तो उन्हें सर्कस दें।”

आज के भारतीय सम्राटों (जिनकी बेशर्मी से सहायता हमारी अधिकांश बिकी हुई और चाटुकार गोदी मीडिया करती है) कहते हैं, “अगर आप गरीबी, बेरोजगारी, भूख, मूल्य वृद्धि, स्वास्थ्य देखभाल, किसान संकट, आदि की भारी समस्याओं को हल नहीं कर सकते हैं, तो भारतीय लोगों का ध्यान भटकाने के लिए स्टंट और नौटंकी, जैसे ‘विकास’, योग दिवस, राम मंदिर, स्वच्छता अभियान, सीएए, अनुच्छेद 370 का निरसन आदि करें।”