निजामुद्दीन मरकज़ मामले में बोले पूर्व उपराज्‍यपाल – लोगों को निकालना दिल्‍ली पुलिस की थी जिम्‍मेदारी 

दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी मरकज़ में मौजूद 24 लोगों में कोरोनावायरस पॉजिटिव पाया गया है। मंगलवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने यह जानकारी दी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अंदाजा लगाया जा रहा है कि वहां 1500, 1600 के आस-पास लोग हैं। 1033 लोगों को निकाला जा चुका है जिनमें से 334 लोगों को अस्पताल और 700 के करीब लोगों को क्वारेंटाइन सेंटर भेजा गया है। स्क्रीनिंग चल रही है। मरकज़ में ठहरे 24 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

इस मामले में अब दिल्‍ली के पूर्व उपराज्‍यपाल नजीब जंग का अहम बयान सामने आया है। उन्‍होंने कहा कि मरकज़ में इकट्ठा हुए लोगों को निकालने की जिम्‍मेदारी दिल्‍ली पुलिस की थी। उन्‍होंने कहा, ‘दिल्‍ली पुलिस का यह दायित्‍व था कि वह उनलोगों (मरकज़ में जमा लोग) पर कार्रवाई करे। उनलोगों को सिर्फ चिट्ठी लिखना पर्याप्‍त नहीं था।’

बता दें कि दिल्‍ली पुलिस ने बड़ी तादाद में मौजूद लोगों को लेकर मरकज़ को नोटिस जारी किया था। पुलिस का कहना था कि यह धारा 144 का उल्‍लंघन है। मरकज़ के वकील का दावा है कि इसका जवाब पुलिस को दिया गया था।

वहीं मरकज़ के वकील फुजैल अय्यूबी के अनुसार 24 मार्च को एसएचओ निज़ामुद्दीन ने उन्हें धारा 144 के उल्लघंन का नोटिस भेजा था, जिस पर हमने उन्हें उसी दिन जवाब देते हुए बताया कि मरकज़ को बंद कर दिया गया है। 1500 लोगों को उनके घर भेजने की जानकारी भी दे दी।

साथ ही यह भी बता दिया कि जो एक हजार लोग बच गए हैं, वे दूर-दराज के रहने वाले हैं। उन्हें भेजना मुश्किल है। उनमें कुछ विदेशी भी हैं। 28 मार्च को एसीपी लाजपत नगर का नोटिस आया। उन्होंने कहा कि मरकज गाइडलाइंस का उल्लघंन कर रहा है। बकौल अय्यूबी, उन्‍होंने इसका भी जवाब उन्‍हें भेज दिया।


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