Home राष्ट्रिय असम में एनआरसी के नाम पर हो रहा बंगाली मुस्लिमों से ‘भेदभाव’

असम में एनआरसी के नाम पर हो रहा बंगाली मुस्लिमों से ‘भेदभाव’

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असम में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजेंस) यानी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर बंगाली मुसलमानों की तरफ़ से प्रशासन पर भेदभाव के आरोप लग रहे है। ध्यान रहे असम देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां एनआरसी को अपडेट करने का काम चल रहा है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था द्वारा नियुक्त चार विशेष व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से एनआरसी अपडेट के नाम पर असम में बंगाली मुसलमानों के साथ कथित भेदभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पत्र लिखा है।

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पत्र में कहा गया है कि ‘एनआरसी अपडेट प्रक्रिया ने असम में उन बंगाली मुसलमानों के बीच चिंता और भय को जन्म दे दिया है जो अपनी नागरिकता साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज रखने के बावजूद एक विदेशी के रूप में कथित स्थिति के कारण लंबे समय से भेदभाव के शिकार होते रहे हैं।’

पत्र में आगे लिखा गया है कि ‘जिन लोगों को अंतिम एनआरसी से बाहर रखा जाएगा, उन लोगों के निहितार्थों की रूपरेखा तैयार करने वाली कोई आधिकारिक नीति नहीं है। यह बताया गया है कि उन्हें विदेशी माना जाएगा और पूर्व जांच के अभाव में उनके नागरिकता अधिकारों को रद्द कर दिया जा सकता है। बाद में विदेशियों को ट्राइब्यूनल में अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा जा सकता है।’

इस मामले मे ऑल असम अल्पसंख्यक छात्र संघ के अध्यक्ष अजीजुर रहमान कहते हैं, “असम में जिस कदर नियमों के ख़िलाफ़ जाकर सरकारी अफ़सर एनआरसी अपडेट का काम कर रहे हैं, उससे हमें संदेह है कि बंगाली मुसलमान और बंगाली हिंदू में भेदभाव हो सकता है।

उन्होने कहा, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था के लोगों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भेजे पत्र में जो बातें लिखी हैं वो काफ़ी जायज़ हैं। हम इस विषय पर असम सरकार और भारत सरकार को पहले ही ज्ञापन सौंप चुके हैं।” हमान ने कहा कि केंद्र सरकार को एनआरसी प्रक्रिया में इस तरह के मतभेद की जांच करवानी चाहिए क्योंकि सैकड़ों लोग इस तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

वहीं प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता तथा असम वित्त निगम के अध्यक्ष विजय गुप्ता का कहना है कि “असम सरकार की तरफ़ से किसी के साथ भेदभाव करने का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन अगर कोई अवैध प्रवासी है तो उसका नाम एनआरसी में नहीं आएगा। इसके अलावा फ़ाइनल ड्राफ्ट प्रकाशित करने के बाद भी दावा और आपत्ति के तहत लोग आवेदन कर सकेंगे। एनआरसी वेरिफ़िकेशन के नाम पर अगर किसी को परेशान किया जा रहा है तो उस अधिकारी की शिकायत करनी चाहिए। सरकार तुरंत कार्रवाई करेगी।”

बता दें कि असम में मुसलमानों की आबादी क़रीब 34 फ़ीसदी है। उनमें अधिकतर बंगाली मुसलमान हैं जो बीते सौ सालों के दौरान यहां आकर आबाद हुए हैं। ये लोग बेहद ग़रीब, अनपढ़ और अप्रशिक्षित मज़दूर हैं।

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