ट्वीट मामले में जफरुल इस्लाम को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस, खाली हाथ लौटी

नई दिल्ली: हाल ही में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ज़फरुल इस्लाम के खिलाफ कुवैत को लेकर किए गए ट्वीट के मामले में देशद्रोह (Sedition) और धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन्हे गिरफ्तार करने पहुंची थी। लेकिन विरोध के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा।दरअसल, दिल्ली पुलिस बिना नोटिस के ही पहुंची थी।

पुलिस द्वारा इस संबंध में मामला दर्ज किए जाने के बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने पुलिस को चिट्ठी लिखकर अपनी उम्र का हवाला देते हुए यह कहा था कि उन्हें जांच के लिए न बुलाया जाए। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी उम्र ज्यादा है और उन्हें हाइपर टेंशन है। इसलिए उनसे उम्रजनित बीमारी को देखते हुए घर पर आकर ही पूछताछ नहीं की जाए। जो भी पूछना है उसके लिए प्रश्नावली बनाकर भेजी जाए।

बता दें कि इसके पहले जफरुल इस्लाम ने ट्विटर पर लिखा था कि  ”अगर भारत के मुसलमानों ने अरब और दुनिया के मुसलमानों से कट्टर/असहिष्णु लोगों के हेट कैंपेन, लिंचिंग और दंगों की शिकायत कर दी तो ज़लज़ला आ जाएगा।” जफरुल इस्लाम खान ने ज़ाकिर नाइक का भी समर्थन किया था।

उक्त बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने के बाद ज़फरुल इस्लाम ने शुक्रवार को कहा था कि अगर मेरे वक्तव्य से किसी को ठेंस पहुंची हो तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। हमारा देश मौजूदा समय हेल्थ इमरजेंसी से गुजर रहा है और ऐसे हालात में मेरे उस ट्वीट का गलत अर्थ निकाला गया है।

हालांकि पुलिस ने वसंत कुंज निवासी एक व्यक्ति की शिकायत मिलने के बाद खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) और 153ए (धर्म, नस्ल और जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता भड़काने) के तहत 30 अप्रैल को एक प्राथमिकी दर्ज की।

पुलिस ने बताया कि प्रथमिकी में, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि खान का पोस्ट ‘‘भड़काऊ”, ‘‘इरादतन” और राजद्रोह वाला था तथा यह समाज के सौहार्द को बिगाड़ने और उसे विभाजित करने के मकसद से था।


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