दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश – तीन दिन में रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्याओं का निपटारा

दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना संकट के दौरान रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए राहत पैकेज के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित नोडल अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने का निर्देश दिया है।

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संजीव नरुला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई सुनवाई के बाद ये आदेश दिया। याचिका फजल अब्दाली ने दायर किया था। याचिकाकर्ता की ओर से वकील स्नेहा मुखर्जी ने कोर्ट से कहा था कि दिल्ली के खजूरी खास, श्रम विहार और मदनपुर खादर में रहने वाले तीन रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों को तुरंत राहत उपलब्ध कराया जाए। याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार की ओर से कोरोना से निपटने के लिए जो राहत पैकेज घोषित किए गए उनमें रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए कुछ नहीं था।

याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई 2018 को रोहिंग्या शरणार्थियों को बुनियादी सुविधाए जैसे पेयजल, सफाई, चिकित्सा सुविधा, बच्चों की शिक्षा इत्यादि उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बावजूद रोहिंग्या शरणार्थियों को ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पिछले 31 मार्च और 23 अप्रैल को संबंधित अधिकारियों को जो ई-मेल भेजे थे उसमें रोहिंग्याओं की समस्याओं को लेकर सामान्य किस्म की शिकायतें की थी लेकिन उसमें स्पष्ट विवरण नहीं था।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त नोडल अफसरों के समक्ष रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों का मामला सुप्रीम कोर्ट में अभी लंबित है इसलिए कोर्ट को इसी मामले पर दूसरी याचिका पर सुनवाई करना ठीक नहीं है। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से वकील संजय घोष ने कहा कि राज्य सरकार रोहिंग्या परिवारों को पर्याप्त राशन उपलब्ध करा रही है। कोर्ट ने कहा कि खजूरी खास, श्रम विहार और मदनपुर खादर के पास चार हंगर सेंटर चलाए जा रहे हैं ताकि कोई भूखा न रहे। उसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नोडल अफसर के पास रोहिंग्याओं की समस्याएं रखने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उन शरणार्थियों का नाम नोडल अफसर को उपलब्ध कराने का आदेश दिया जिन्हें राशन और पानी की जरुरत है। कोर्ट ने नोडल अफसर को निर्देश दिया कि वे शिकायत मिलने के तीन दिनों के अंदर उनका निपटारा करें।


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