रोते हुए बोले मेहमूद मदनी ज़ुल्म सहेंगे लेकिन देश पर आंच नहीं आने देंगे

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उत्तर प्रदेश में जमीयत का एक जलसा चल रहा है जिसमें हजारों की तादाद में मुसलमान इकट्ठा हुए हैं इस जलसे में देश के मुसलमानों के हालातों पर चर्चा की गई इसके साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा के बारे में भी चर्चा हुई जलसे में सबसे पहले मौलाना महमूद मदनी ने बात की वह बात करते-करते बहुत ही ज्यादा भावुक हो गए उनका अंदाज बहुत शायराना था लेकिन इसके साथ ही उनकी आंखों से आंसू निकल आए।

अब आप यह सोच रहे होंगे कि आखिर किस बात के चलते वो इतने भावुक हो गए हैं दरअसल इस जलसे में बात करते हुए महमूद मदनी ने कहा कि सब्र करना किसे कहते हैं यह बात कोई मुसलमानों से सीखे आज देश का मुसलमान बेइज़्ज़त होते हुए भी खामोश है इसके साथ उन्होंने कहा की नफ’रत को फैलाने देश के दु’श्मन है और उन्होंने कहा नफ’रत को नफ’रत से नहीं मिटाया जा सकता ठीक उसी तरह जैसे आ’ग को आ’ग से नहीं मिटाया जाया जा सकत।

हालाँकि मदनी साहब का अंदाज असदुद्दीन ओवैसी से बिल्कुल जुदा था लेकिन उन्होंने भी असदुद्दीन ओवैसी की तरह मोदी पर निशाना साधा लेकिन उनका अंदाज भड़’काऊ नहीं बल्कि शायराना था उन्होंने कहा की जो लोग अखंड भारत की बात करते हैं वह इस मुल्क के साथ दुश्म’नी कर रहे हैं।

आगे वह कहते हैं कि देश के मुसलमानों का चलना पूरी तरह से दूभर कर दिया गया है आगे को कहते हैं हम कमजोर है और हर ज़ु’ल्म बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन अपने वतन पर आंच कभी भी नहीं आने देंगे इसको हमारी कमजोरी न समझा जाए बल्कि हमारा मजहब हमें यह सिखाता है।

इसके साथ ही सहारनपुर जिले में समिति में लोगों को संबोधित करते हुए और देश के ताजा हालातों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में बहुमत उन लोगों का नहीं तो नफरत फैला रहे हैं और अगर हम उनके उकसाने पर उसी लहजे में उनको जवाब देने लगेंगे तो फिर अपने मकसद में पूरी तरह से कामयाब हो जाएंगे।

आगे वो कहते हैं कि इस तरह का माहौल पैदा करने और नफरत फैलाने वाले लोग वतन के ग’द्दार और वि’रोधी देश के एजेंट है इसके साथ ही उन्होंने सरकार को भी एक संदेश दिया है उन्होंने कहा कि यह देश बहुत मेहनत से हमारे बुजुर्गों ने आजाद करवाया है और इसके लिए उन्होंने बहुत ज्यादा कुर्बानी दी है।

उन्होंने सरकार को सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि सत्ता हमेशा नहीं रहती है कौमे हमेशा नहीं रहती उन्होंने सरकार और मीडिया से गुजारिश की है की बढ़ती हुई नफ’रत को किसी तरह से रोका जाए ये सम्मेलन 2 दिन तक चला जिसमें मौलाना मदनी ने आधे घंटे तक लगातार बात की लेकिन इस सम्मेलन में उनका अंदाज़ काफी बेहतरीन था उन्होंने बार-बार शायराना अंदाज में ही बात की।

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