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Tuesday, October 19, 2021

मुस्लिमों ने किया हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत – ‘राष्ट्रीय पशु के रूप में गाय भाईचारे को मजबूत करेगी’

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। कोर्ट के इस फैसले की मुस्लिम मौलवियों ने भी प्रशंसा की है। उन्होंने अदालत के इस सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह के कदम से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारा और एकता ही मजबूत होगी।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और प्रमुख सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर अपनी राय देते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के अवलोकन को व्यवहार में लाया जाना चाहिए। “मैं हाईकोर्ट के अवलोकन का स्वागत करता हूं। हम सदियों से इस देश में सौहार्द और भाईचारे के साथ रह रहे हैं। यहां तक ​​कि मुगल शासक बाबर ने भी अपने उत्तराधिकारी और बेटे हुमायूं से हिंदू भावनाओं का सम्मान करने और गोह’त्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा था।

इसी तरह, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव, शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने भी सुझाव का समर्थन करते हुए कहा: “हमारा पहले से ही दृढ़ विश्वास है कि यदि कोई जानवर आस्था से जुड़ा है, तो उसे चोट नहीं पहुंचानी चाहिए। यदि अन्य धर्मों की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो गोह’त्या वर्जित है। यही इस्लाम और भारतीय संस्कृति का असली संदेश है।”

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने भी उच्च न्यायालय के आदेश की सराहना करते हुए कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना देश के लिए सम्मान की बात होगी। रिजवी ने कहा, “जो लोग गाय का व’ध करते हैं, उन्हें ऐसा करने से पहले सोचना चाहिए कि वे सिर्फ एक जानवर नहीं बल्कि अपनी मां का व’ध कर रहे हैं।”

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यूपी के संभल के नखासा थाने में गौह’त्या रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी में गिरफ्तार और जेल भेजे गए जावेद नाम के व्यक्ति की जमानत अर्जी खारिज करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने को लेकर टिप्पणी की।

अदालत ने न केवल यह सुझाव दिया, बल्कि गोह’त्या की घटनाओं को तालिबान की समस्या से भी सीधे तौर पर जोड़ा, लोगों को चेतावनी दी कि उन्हें तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करना नहीं भूलना चाहिए। आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती का हवाला देते हुए, न्यायमूर्ति यादव कहते हैं कि एक गाय, अपने जीवनकाल में, 400 से अधिक मनुष्यों को दूध देती है, लेकिन उसका मांस सिर्फ 80 लोगों को खिला सकता है।”

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